फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kisan Andolan : पंजाब के किसान बोले - अन्नदाता के कारण ही देश में खुशहाली, नहीं हारेगा किसान

Sun, 29 Nov 2020 02:54 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
विज्ञापन
धर्मेंद्र सिंह हरमन भारती, हरेंद्र सिंह लखोवाल। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान कुंडली बॉर्डर पर डट गए हैं। किसानों का कहना है कि वे अपना हक लेकर ही वापस जाएंगे। उनका कहना है कि अन्नदाता के कारण ही देश में खुशहाली है। उनके शांतिपूर्वक धरने-प्रदर्शन के बावजूद उन पर बल का प्रयोग किया गया। किसान अपनी सभी जायज मांगों के लिए मरते दम तक संघर्ष का मन बना चुका है। सरकार को दमनकारी नीति छोड़कर किसान की मदद करनी चाहिए। 

विज्ञापन


यह बोले किसान
केंद्र सरकार के तीनों कानून किसान विरोधी हैं। किसान इनके खिलाफ शांतिपूर्वक अपना धरना-प्रदर्शन करना चाहता है। यह कानून वापस लेने की बजाय किसानों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है। किसानों पर वाटर कैनन चलाई जा रही है। हमारे साथ गलत किया जा रहा है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार है। सरकार नहीं मानेगी तो किसान अपनी रणनीति बनाकर आगे की कार्रवाई करेंगे। - धर्मेंद्र सिंह हरमन भारती, रोपड़, पंजाब 

जब तक किसानों की मांग पूरी नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा। आज सभी किसान संगठनों ने बैठक कर निर्णय लिया है कि फिलहाल जहां बैठे हैं, वहां पर बैठे रहेंगे। दिल्ली की आर्थिक नाकाबंदी करने से पीछे नहीं हटेंगे। किसान हक के लिए सड़क पर आ गया है। तीनों कानूनों को हर हाल में वापस कराया जाएगा। - हरेंद्र सिंह लखोवाल, महासचिव, भाकियू पंजाब
विज्ञापन



सरकार ने किसानों के साथ अन्याय किया है। सरकार जब तक तीनों कानूनों में संशोधन कर न्यूनतम समर्थन मूल्य को अनिवार्य नहीं किया जाता, तब तक वादे करने का कोई फायदा नहीं है। किसान अपनी लड़ाई लड़ेगा और जीतेगा। इसके लिए अगर छह माह तक रोड पर रुकना पड़ा तो भी किसान पीछे नहीं हटेगा। किसानों को कोरोना के नाम से डराया जा रहा है। जब राजनीतिक दल रैलियां करते हैं तो कोरोना नहीं होता है। किसानों को बरगलाने के बजाय उनकी मांगों को माना जाए। - जसविंद्र सिंह, कुरुक्षेत्र। 

किसान दिल्ली कूच कर रहे थे लेकिन जगह-जगह हमें रोका गया। इसके चलते अब बॉर्डर पर ही रुकने का निर्णय लिया गया है। हर रोज सुबह बैठक कर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। बॉर्डर पर लगातार किसानों की संख्या को बढ़ाया जाएगा। किसान अपनी जायज मांगों को मनवाकर ही जाएंगे।  - जगदीप सिंह रौनक, प्रदेश कोर कमेटी सदस्य, भाकियू।
विज्ञापन




किसान अपनी मांग मनवाने के लिए दिल्ली जाना चाहता था। उनकी मांगों को हरियाणा व पंजाब में सुना नहीं गया था। ऐसे में किसान शांतिपूर्वक दिल्ली जाकर पीएम से मिलना चाहते थे। लेकिन किसानों को रोकने के लिए उन पर पानी बरसाया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। गड्ढे खोदकर पत्थर रखवाए गए। अन्नदाता के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। सरकार को तुरंत प्रभाव से किसानों की मांगों को पूरा करना चाहिए। किसानों को कोरोना का डरा दिखाना गलत है। यह महज डराने के लिए किया जा रहा है। - बलबीर सिंह मान, राष्ट्रीय महासचिव, किसान उत्थान मंच।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें