फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘बीच’ का समाधान चाहती है सरकार, फैसले का इंतजार, किसान आंदोलन तेज करने पर भी विचार

Wed, 09 Dec 2020 02:07 AM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
किसान आंदोलन। (फाइल फोटो)
विज्ञापन

बंद के बाद बुधवार को किसानों और सरकार के बीच छठे दौर की बैठक रद्द हो गई। लगातार लंबा खिंचते जा रहे इस आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार ‘बीच’ का समाधान चाहती है। किसानों को भी अपनी मांग पर सरकार की हां या ना का इंतजार है। जवाब किसानों के पक्ष में न रहा तो आंदोलन तेज करने की तैयारी की जाएगी।

विज्ञापन


उधर, संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का कहना है कि ‘हमला चाहे जैसा हो लेकिन हाथ हमारा नहीं उठेगा।’ उन्होंने फिर से दोहराया कि वे आंदोलन को हिंसक बनाने के पक्ष में नहीं हैं और उन्हें कोई जल्दबाजी भी नहीं हैं। वे तो पांच से छह माह का राशन साथ लेकर आए हैं, जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं करती, तब तक वे दिल्ली की सीमाओं को घेरे रखेंगे। 


किसानों को दिलवाया जा रहा अहिंसा का सामूहिक प्रण
राष्ट्रीय किसान महासंघ के प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों के काफी किसानों ने दिल्ली को घेर लिया है। आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न सीमाओं पर किसानों के साथ पुलिस का दुर्व्यवहार और धक्कामुक्की जैसी शिकायतें मिल रही हैं। उसके बावजूद हम किसानों को अहिंसा का सामूहिक प्रण दिलवा रहे हैं। पुलिस के सामने ही किसान ‘....हमारा हाथ नहीं उठेगा’ प्रण को नारेबाजी करते हुए काफी देर तक दोहराते हैं और पुलिस को बताते हैं कि वे उनका जोर सहने को तैयार हैं, मगर हटने को नहीं।
विज्ञापन


माहौल खराब करने की साजिश से किसान-सरकार सतर्क
शांतिप्रिय ढंग से चले किसान आंदोलन का माहौल खराब करने की साजिशें अभी तक बरकरार हैं। केंद्रीय व राज्य खुफिया एजेंसियों को इस तरह के कई इनपुट भी मिले हैं। असामाजिक तत्व सोशल मीडिया पर कई भड़काऊ वीडियो वायरल कर रहे हैं, जिनका मकसद सिर्फ इस शांतिप्रिय आंदोलन को खराब करना है। 

खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्र ने बताया कि इस साजिश संबंधी रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है। जिसके बाद किसान संगठनों को भी इस तरह की साजिश से अवगत भी करवाया जा चुका है। सरकार और किसान नेता असामाजिक तत्वों की ऐसी साजिशों को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं। किसान नेताओं का कहना है कि ऐसे असामाजिक तत्वों से उनका और आंदोलन का कोई लेना-देना नहीं है।

रेलवे यूनियन भी किसानों के साथ आई
इस वक्त किसान आंदोलन को विभिन्न संगठनों और सियासी दलों द्वारा समर्थन देने की होड़ लगी हुई है। किसान नेता यह साफ कर चुके हैं कि उनका आंदोलन गैर राजनीतिक है और किसी भी संगठन को अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने नहीं दी जाएंगी। उधर, रेलकर्मियों की उत्तर रेलवे मैन्यू यूनियन ने भी किसानों के इस आंदोलन को अपना समर्थन दे दिया है। यूनियन के महामंत्री बीसी शर्मा और नेता प्रभाकर ने बताया कि बंद को भी उनकी यूनियन का पूरा समर्थन है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें