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कृषि कानूनों का विरोध : सरहिंद की महापंचायत में केंद्र पर बरसे किसान नेता, बोले- कारपोरेट बनाम आमजन बना आंदोलन

Thu, 25 Mar 2021 12:23 AM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहगढ़ साहिब (पंजाब)
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सरहिंद में किसानों की महापंचायत। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ सरहिंद की अनाज मंडी में हुई महापंचायत में किसान नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन अब कारपोरेट बनाम आमजन बन गया है। केंद्र के अड़ियल रवैये के खिलाफ इसे शांतिपूर्ण ढंग से पूरे देश में फैलाया जाएगा और जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, वहां किसान मोर्चे के नेता भाजपा के खिलाफ प्रचार करने पहुंचेंगे। 

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महापंचायत में पहुंचे संयुक्त किसान मोर्चे के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी, दर्शनपाल सिंह व बलबीर सिंह राजेवाल ने मंच से साफ किया कि सियासी फ्रंट बनाए जाने की बात मोर्चे को बदनाम करने के लिए राजनीतिक दल फैला रहे हैं। जबकि मोर्चे का ऐसा कोई विचार नहीं है। महापंचायत में हजारों की तादाद में किसान, मजदूर, आढ़ती व आमजन किसान नेताओं की बात सुनने पहुंचे। इसमें संयुक्त किसान मोर्चे के वरिष्ठ नेताओं के साथ फिल्म अदाकार योगराज सिंह, पंजाबी गायक तरसेम जस्सड़, रेशम अनमोल, पम्मी बाई मौजूद रहे। 

किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि कृषि कानूनों के विरोध में 26 मार्च को एक बार फिर भारत बंद करवाया जा रहा है। कारण यह है कि सरकार किसानों की बात ही सुनना ही नहीं चाहती। उलटे वह अपने चहेतों के जरिए किसान आंदोलन पर लोगों को भ्रमित कर रही है और हमारी साख बिगाड़ने में जुटी है। इसलिए संयुक्त मोर्चे ने फैसला लिया है कि किसान आंदोलन को अब शांतिपूर्वक ढंग से आगे लेकर जाएंगे।

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उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में राजनीतिक मंशा को कोई जगह नहीं है। यह अकेले किसानों का नहीं, आमजन का आंदोलन है। केंद्र सरकार किसानों की उपज को कारपोरेट घरानों के गोदामों में बंद कर इसे लोगों को महंगे दाम में बेचना चाहती है। इसके लिए एफसीआई को तोड़ने की कोशिश चल रही है और किसानों की जमीनों का रिकॉर्ड मांगा जा रहा है। संयुक्त मोर्चा इसी का विरोध कर रहा है। राजेवाल ने कहा कि बंगाल के 92 फीसदी किसान हमारे आंदोलन की भावना को समझते हैं। इसलिए वहां के नतीजे हमारे लिए निर्णायक होंगे।

गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि हम पूरे भारत में महापंचायतें कर रहे हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव का माहौल ही बदल गया है। वहां के लोगों ने किसानों की बात को ध्यान से सुना है और उनकी परेशानी को समझा है। इसके बाद पश्चिम बंगाल में बीजेपी की हार तय हो गई है। जहां तक दिल्ली किसान आंदोलन की बात है, यह जितना लंबा चलेगा हम चलाएंगे। 

सरकार एमएसपी से भाग रही है और एफसीआई द्वारा किसानों की जमीनों का रिकॉर्ड मांगा जा रहा है। ऐसा पहले हरियाणा में भी हुआ है। सरकार लास्ट लॉस के नाम पर किसानों की फसल के दाम गिराकर खरीदना चाहती है। यह शब्द ही हमने पहली बार सुना है। इससे जाहिर है कि सरकार कारपोरेट घरानों की भाषा बोल रही है। फसल खरीद पर कई ऐसी शर्तें लगा दी गई हैं, जिससे किसान अपनी फसल कम दाम में बेचने को मजबूर हो जाए। 
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32 किसान संगठन संभालें पंजाब की कमान

फिल्म अदाकार योगराज सिंह ने कहा कि 31 किसान संगठन खुद पंजाब की कमान संभालें, ताकि सरकारों के कान खोले जा सकें। उन्होंने पंडाल में बैठे किसानों से पूछा कि जब यह कृषि कानून नहीं थे तो क्या किसान खुश थे, अगर यह कानून वापस होते हैं तो क्या किसान खुश होंगे? इस पर सबने हाथ उठाकर उनकी बात का समर्थन किया। तब उन्होंने कहा कि सभी 31 किसान संगठनों से गुजारिश है कि वह पंजाब का नेतृत्व करें। 

किसान नेता दर्शनपाल सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन पूरे देश में केंद्र की अड़ियल सरकार के खिलाफ बगावत के सुर पैदा करेगा और आने वाले समय में यह जन आंदोलन बनकर उभरेगा। इसके लिए 26 मार्च को भारत बंद किया जा रहा है। मतलब उस दिन रेल, बस, दूध, परिवहन, कारोबार सब कुछ बंद रहेगा। इसके बाद 27-28 को आगे की रणनीति बनाई जाएगी। 
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