राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ के अनुसार अपनी मांगों के समर्थन में सभी किसान संगठन लंबे संघर्ष की तैयारी के साथ यहां पहुंचे हैं। किसान लोग पांच से छह माह का राशन तक लेकर आए हैं। मगर यह सूचनाएं लगातार मिल रही है कि कुछ असामाजिक तत्व हमारे आंदोलन को खराब करने की साजिश कर रहे हैं, जिसे लेकर हम सतर्क हैं।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी भी साफ कर चुके हैं कि हिंसा करने वाले लोगों से किसान आंदोलन का कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे लोग पकड़ में आते हैं तो उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जाए और ऐसे तत्वों को हम भी पकड़कर पुलिस के हवाले करेंगे। उधर, देश के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि सरकार अपने स्तर पर किसानों को समझाने का भरसक प्रयास कर रही है और करती रहेगी। सरकार किसी जल्दबाजी में नहीं है। मगर किसानों की आड़ में कुछ लोग राजनीति कर रहे हैं। सरकार कभी किसानों के अहित में कोई फैसला नहीं ले सकती और न ही लेगी।
आंदोलन में गड़बड़ करने वालों पर नजर रखेंगी सुरक्षा एजेंसियां
आंदोलन को हिंसक बनाने की जो साजिश चल रही है उस पर केंद्रीय व हरियाणा की सुरक्षा व खुफिया एजेंसी लगातार नजर रखेंगी। हरियाणा पुलिस के महानिदेशक मनोज यादव ने इसके लिए एडीजीपी स्तर के आला पुलिस अफसरों की ड्यूटी भी लगा दी है। प्रदेश में आंदोलन को लेकर क्या हालात हैं, इस आंदोलन में गड़बड़ी की क्या आशंका है, आंदोलन को लेकर केंद्रीय व राज्य की खुफिया एजेंसियों का क्या इनपुट है और आगे आने वाले दिनों में यह आंदोलन क्या रूप ले सकता है, इसकी पूरी विस्तृत रिपोर्ट हरियाणा पुलिस तैयार कर प्रदेश सरकार को सौंपेगी। इसके लिए यह आला पुलिस अफसर तीन दिन फील्ड में रहेंगे और स्थानीय पुलिस व सीआईडी से तालमेल रखेंगे।