करतारपुर कॉरिडोर को लेकर भारत और पाकिस्तान की सरकारें पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं, तभी तो देशों देशों में निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है।
भारत-पाकिस्तान को विभाजित करती डेरा बाबा नानक सेक्टर की जीरो लाइन के दोनों ओर उड़ते धूल के गुबार, काम कर रहे मजदूर, इंजीनियर और विशेषज्ञ, बड़े-बड़ी मशीनें, मिट्टी व लोहे से भरे बड़े-बड़े टिप्परों का शोर सुन कर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण को लेकर दोनों देशों की सरकारें वचनबद्ध हैं। तेज हवाओं से उड़ने वाले मिट्टी के गुबार सीमाओं का बंधन तोड़कर एक दूसरे में समा जाते हैं।
इन गुबारों के साथ आई मिट्टी निर्माण कार्य में जुटे दोनों तरफ के मजदूरों के ऊपर जब गिरती है, तो मानो इस बात का एहसास करवा रही हो कि दोनों देशों के बीच जमी धूल इस कॉरिडोर के निर्माण के बाद मिट जाएगी। पाकिस्तान ने अपनी तरफ इंटरनेशनल बॉर्डर तक दो बड़े गेट का निर्माण कर दिया है। दोनों गेटों के बीच कुछ मीटर का फासला दूर से ही दिखाई देता है। इन दोनों गेटों के आसपास बड़े-बड़े ट्रक वहां मिट्टी डालते दिखाई देते हैं।
पाकिस्तान की जीरो रेखा से शंकरगढ़ तक लगभग सात किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक यात्री निवास का काम भी अंतिम चरण में दाखिल हो चुका है। पाकिस्तान सरकार ने 31 अगस्त तक काम पूरा करने का दावा किया है।