शोभा यात्रा के साथ निकले साधु-संत
भारतीय रक्षा संत समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रामस्वरूप ब्रह्मचारी की अध्यक्षता में सबसे पहले गुरुवार सुबह खेड़ा मंदिर बिलासपुर पर चल रहे रामायण पाठ का समापन किया गया। उसके पश्चात हवन किया गया। इसमें साधु-संतों समेत कस्बा के गणमान्य लोगों ने पूर्ण आहुति डाली। खेड़ा मंदिर कमेटी सदस्य प्रधान अनिल कक्कड़, रविंद्र गोयल, शिवकुमार धमीजा, राकेश बेदी समेत क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने फूल मालाएं पहना कर संतों व महात्माओं का स्वागत किया। पवित्र ज्योति प्रज्ज्वलित करके शोभा यात्रा में शामिल की गई। शाही यात्रा बैंड बाजों के खेड़ा मंदिर से शुरू होकर मेन बाजार छोटा बस स्टैंड, कपालमोचन मेला परिसर से होते हुए पालकी को उठाए साधु संत कपालमोचन सरोवर पर पहुंचे।
126 एकड़ में चार सेक्टरों में लग रहा मेला
मेला प्रशासक एवं एसडीएम बिलासपुर जसपाल सिंह गिल ने बताया कि मेला कपालमोचन लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है और लाखों की संख्या में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस स्थल पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को अपनी बुराइयों का त्याग करना चाहिए। कपालमोचन मेला क्षेत्र को चार सेक्टरों में बांटा गया है। बिजली, पानी, साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था की गई है और तीनों सरोवरों में स्वच्छ पानी भरा गया है। सुरक्षा के मध्य नजर पुलिस के 2000 कर्मचारी तैनात है। मेला के प्रत्येक क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है। मेले में लगभग 4000 अधिकारी व कर्मचारियों को तैनात किया गया है।
सरोवरों में मिल जाता है साधुओं के तप का तेज
महंत रामस्वरूप ने बताया कि जिस तरह से कुंभ मेले की शुरुआत साधुओं के स्नान के बाद होती है, उसी तरह कपालमोचन मेले का शु्भारंभ साधु प्रवेश शाही स्नान के साथ किया जाता है। संत एकादशी पर पहला स्नान इसलिए करते हैं क्योंकि साधु अपनी जिंदगी में जो तप करते हैं, स्नान करने से उसकी शक्तियां सरोवरों के पानी में मिल जाती हैं। इससे इन सरोवरों में स्नान करने का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
कपालमोचन का न सिर्फ हरियाणा बल्कि पूरे देश में अपना अलग महत्व है। कपालमोचन ऋषि मुनि व तपस्वियों की धरती रही है। साधु संतों के अलावा भगवान शिव, श्री राम, पांडव व श्री गुरु नानक देव जी व गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहां पर कदम रखकर इस धरती को पवित्र किया है।