कलायत विधानसभा से विधायक बनीं महिला को एक बार फिर से मंत्रिमंडल में जगह मिलने के साथ ही इतिहास ने अपने आप को दोहराया है। कलायत विधानसभा का इतिहास रहा है कि जब भी किसी राजनीतिक दल ने महिला प्रत्याशी पर भरोसा करके चुनाव में उतारा, उसने डंके की चोट पर जीत दर्ज की।
केवल जीत ही नहीं विजयी रहने वाली महिला प्रत्याशी सरकार में मंत्री भी बनीं। देश के आजाद होने के बाद पैप्सू का हिस्सा बने कलायत हलका को बाद में पंजाब बनने के बाद कैथल में मिला दिया गया। आजाद होने के बाद 1952 से लेकर 2019 तक विभिन्न राजनीतिक दलों ने केवल चार बार महिला प्रत्याशी को मैदान में उतारा।
वर्ष 1957 व 1962 में कांग्रेस पार्टी ने ओमप्रभा जैन को टिकट देकर चुनावी समर में उतारा था। दोनों ही बार उन्होंने जनसंघ के प्रत्याशी हरेंद्र चौधरी व बारू राम को हराया। न केवल हराया बल्कि विधानसभा में मंत्री भी रहीं। हरियाणा बनने के बाद 39 वर्षों तक किसी भी राजनीतिक दल ने किसी भी महिला प्रत्याशी को चुनावी दंगल में नहीं उतारा।
वर्ष 2005 में कांग्रेस पार्टी ने गीता भुक्कल पर दाव खेलते हुए उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया तथा उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 1412 मतों से हराया। 2005 के बाद भाजपा ने पहली बार किसी महिला पर भरोसा करते हुए कमलेश ढांडा पर विश्वास करते हुए उन्हें चुनावी समर में उतारा।
भाजपा की आशाओं को पूरा करते हुए कमलेश ढांडा ने भी कलायत हलका की परंपरा को कायम रखते हुए कांग्रेस के दिग्गज नेता जयप्रकाश को हरा कलायत हलका में भाजपा की जीत की नींव रखते हुए पहली बार कमल का फूल खिलाया।