हैदराबाद में महिला चिकित्सक से दरिंदगी के बाद देश भर में महिला सुरक्षा फिर चर्चा में है। हर कोई मामले में आक्रोश व्यक्त कर रहा है, लेकिन महिला सुरक्षा के मामले में सरकार और सरकारी विभाग गंभीर नजर नहीं आते हैं।
मसलन, दिल्ली में 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद तब की प्रदेश सरकार ने महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए हरियाणा रोडवेज की बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का फैसला लिया था, जोकि सात साल बाद भी फाइलों में ही कैद है। प्रस्ताव की फाइल केंद्र, राज्य सरकार और रोडवेज विभाग के बीच धक्के खा रही है।
यही नहीं, निर्भया फंड के तहत हरियाणा को मिले 16.71 करोड़ रुपये में से केवल 6.6 करोड़ रुपये ही खर्च हो सके हैं। बता दें कि साल 2012 में दिल्ली के निर्भया कांड के बाद केंद्र सरकार ने 2013 में निर्भया फंड बनाया था। इसके बाद प्रदेश की तत्कालीन हुड्डा सरकार ने रोडवेज बसों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने का फैसला लिया था, लेकिन इसे आज तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।