पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस अनुपेंद्र ग्रेवाल ने डेरामुखी के करीबी पवन इंसा की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर कर लिया है।
इसके साथ ही मामले की सुनवाई के लिए नई बेंच का निर्धारण करने के लिए केस को चीफ जस्टिस को रेफर कर दिया है। पवन ने पंचकूला में दर्ज एफआईआर में मनी लॉंड्रिंग पक्ष की जांच ईडी से करवाने के आदेशों को चुनौती दी है।
पवन इंसा ने एडवोकेट जसदेव मेंहदीरत्ता के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए बताया कि 25 अगस्त 2017 को पंचकूला की सीबीआई अदालत ने डेरामुखी को साध्वी यौन शोषण मामले में दोषी करार दिया था।
इसके बाद पंचकूला में हुए दंगों की साजिश रचने के आरोप में याची पर पंचकूला पुलिस ने सेक्टर-5 पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की थी।
पवन इंसा पर आरोप है कि इन दंगों की साजिश उसने रची थी। अब इस एफआईआर में मनी लॉंड्रिंग के पक्ष की जांच के लिए ईडी को सौंप दिया है।
ऐसा इसलिए किया गया है ताकि ईडी पता लगा सके कि इन दंगों के लिए पैसा कहां से जुटाया गया था। इसी मामले में ईडी को अब पवन इंसा के बयान दर्ज करने हैं। इसी को पवन इंसा ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।