चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी का दुनियाभर में नाम है। यहां विज्ञान संकाय में बड़े-बड़े वैज्ञानिक हैं जो देश दुनिया के टॉप वैज्ञानिकों में अपना स्थान रखते हैं, बावजूद इसके विज्ञान जर्नल को पहचान नहीं मिल सकी है। अब यूजीसी ने मानक पूरे न होने पर इस जर्नल को अपनी सूची से बाहर कर दिया। इससे इस जर्नल की साख और गिर गई। सालभर में इसके लिए लेख जुटाना मुश्किल हो रहा है। वैज्ञानिक शोधपत्र भेजना ही नहीं चाहते। अब दोबारा से नया संपादक मंडल इस जर्नल को पहचान दिलाने के लिए तैयार कर रहे हैं।
पीयू के विज्ञान संकाय का जर्नल 50 साल से अधिक पुराना है। शुरुआत से ही यह निकाला जा रहा है। उस समय इस जर्नल के लिए पीयू के वैज्ञानिक भी शोधपत्र लिखते थे, क्योंकि यह जर्नल कई बार यूजीसी की केयर लिस्ट में शामिल हुआ और कई बार बाहर। शोधपत्र वैज्ञानिक वहीं देना पसंद करते हैं जिस जर्नल की पहचान अच्छी हो और कम से कम देश में यूजीसी की सूची में शामिल हों।
सालाना डेढ़ लाख रुपये खर्च करती है पीयू
यूजीसी की सूची में शामिल होने के बाद ही शोधपत्र प्रकाशन का लाभ मिलता है। बाकायदा उसके लिए अंक मिलते हैं, जो पदोन्नति में काम आते हैं। यह सालाना जर्नल है। इसके प्रकाशन पर पीयू डेढ़ लाख से अधिक रकम खर्च करती है। आज जर्नल की स्थिति दयनीय है। इसका कारण यूजीसी ने इसे मानकों में फिट नहीं बताया है। सबसे प्रमुख कारण तो यही है कि जर्नल की अपनी वेबसाइट ही नहीं है। प्रकाशित जर्नल ऑनलाइन नहीं हैं। शोधपत्रों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इन तमाम कारणों के चलते यूजीसी ने इसे अनफिट किया। हालांकि अब फिर से इसे पटरी पर लाने की कवायद संपादक मंडल ने शुरू कर दी है।
पीयू के वैज्ञानिक अपने जर्नल को दें शोधपत्र
पीयू के विज्ञान संकाय की रैंकिंग बेहतर है। यहां के भौतिक विज्ञान विभाग व यूआईपीएस विभाग की अलग पहचान है। रसायन विज्ञान, जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान विभाग आदि में भी प्रसिद्ध वैज्ञानिक हैं, लेकिन अधिकतर वैज्ञानिकों के लेख अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित होते हैं। उससे वैज्ञानिकों को विश्वभर में पहचान मिलती है। पीयू के जानकारों का कहना है कि अच्छे शोधपत्र जो दुनिया में पहचान पीयू की उजागर करें उन्हें अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित होना चाहिए लेकिन कुछ शोधपत्र यहां के वैज्ञानिकों को अपने जर्नल के लिए भी देने चाहिए। हालांकि इसके लिए जर्नल का यूजीसी की सूची में होना शामिल है।
यूजीसी की सूची से बाहर हुए विज्ञान जर्नल को पहचान दिलाने का काम चल रहा है। इसके तमाम वॉल्यूम स्कैन करके अपलोड किए जा रहे हैं। इसकी वेबसाइट बनाने का काम भी शुरू किया जाएगा। यूजीसी से फिर से मान्यता जल्द मिलेगी। -प्रो. देवेंद्र मेहता, संपादक, विज्ञान जर्नल पीयू