चंडीगढ़। अधिकारों का पाठ पढ़ाने वाला पीयू एक और आदेश को लेकर चर्चा में है। यह आदेश एक तरह से गरीबों का मजाक उड़ाने वाला है। यहां के छात्रावासों में सफाई का काम करने वाले कर्मी को महज 30 रुपये घंटा देने का फरमान है। शिक्षकों के बीच यह आदेश मुद्दा बना है। शिक्षक कह रहे हैं कि कुछ छात्रावासों में मजबूरी वाले लोगों की तलाश शुरू कर दी गई है। इस आदेश के जरिए लोगों का सीधा शोषण होगा।
पीयू में छात्रावासों की संख्या 20 है। कोरोना काल में यह बंद थे, लेकिन अब खुल गए। छात्र इनमें रह रहे हैं। कोरोना के कारण विशेष सफाई व्यवस्था के आदेश हैं। कुछ छात्रावासों में यह सफाई हो रही है, लेकिन समुचित नहीं। सफाई कर्मियों की कमी है। इसी को देखते हुए पार्टटाइम सफाई कर्मी रखने के आदेश जारी हुए हैं। आदेश में कहा है कि प्रतिमाह छात्रावासों की ओर से 4000 रुपये दिए जा सकते हैं। प्रतिदिन का आंकड़ा निकाला जाए तो कर्मियों को लगभग 130 रुपये मिलेंगे। प्रतिदिन चार से पांच घंटा इनसे काम लिया जाएगा। चार से पांच घंटे काम का मतलब ये है कि वह दूसरी जगह भी काम नहीं कर सकेंगे। इस आदेश का छात्रावासों के छात्र ही नहीं शिक्षक भी विरोध कर रहे हैं। इस आदेश की वापसी की मांग हो रही है।
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एमटीएस कर्मियों की भर्तियां गुपचुप तरीके से हो रही
कोरोना काल में 250 से अधिक एमटीएस कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया था। उस दौरान इन कर्मियों ने प्रदर्शन किया। पीयू ने आश्वासन दिया था कि जब भी दोबारा जरूरत होगी तो उन्हें बुलाया जाएगा। कुछ कर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गुपचुप तरीके से भर्तियां की जा रही हैं, लेकिन उन्हें बुलावा नहीं आया। तमाम अधिकारी व कुछ शिक्षक अपने चहेते लोगों की भर्तियां कर रहे हैं। भाई-भतीजावाद चल रहा है। कुछ दूसरा खेल भी एजेंसी के जरिए चल रहा है। चर्चा यह भी है कि कुछ अयोग्य लोगों को लिपिक बना दिया गया। हालांकि पीयू इस बारे में यही कह रही है कि वह नियमों के मुताबिक ही हर काम कर रही है। जिम्मेदार अधिकारी इस बारे में कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
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