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RTI कार्यकर्ता का पत्र- हरियाणा सरकार को राजभवन ही नहीं, सदन में भी बहुमत साबित करना होगा

Wed, 30 Oct 2019 10:47 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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मनोहर लाल, दुष्यंत चौटाला - फोटो : अमर उजाला
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भाजपा-जजपा गठबंधन की हरियाणा सरकार को राजभवन में ही नहीं, विधानसभा सत्र में भी बहुमत साबित करना होगा। यह एक परंपरा है और इस पर सुप्रीम कोर्ट भी फैसला सुना चुकी है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट व आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत कुमार ने इस संबंध में कानूनी पहलुओं का हवाला देते हुए राज्यपाल को पत्र भी लिखा है।
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उन्होंने मांग की है कि बहुमत साबित करने का असली स्थान विधानसभा है, न कि राजभवन। दरअसल, हरियाणा में भाजपा-जजपा सरकार सत्ता पर काबिज हो चुकी है। दिवाली के दिन राजभवन में सीएम मनोहर लाल और डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला शपथ ले चुके हैं।

सीएम ने जजपा के दस और सात निर्दलीय विधायकों के समर्थन पत्र सहित कुल 57 विधायकों की सूची राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य को सौंपी है। जिसके बाद शपथ समारोह के जरिए नई सरकार अस्तित्व में आ गई, लेकिन नव गठित सरकार के लिए हरियाणा विधानसभा के पहले सत्र में सदन में भी विश्वास मत हासिल करना आवश्यक है।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया

पत्र में लिखा गया कि सुप्रीम कोर्ट के 9 सदस्यीय संवैधानिक बेंच के 11  मार्च 1994 में दिए गए एसआर बोम्मई बनाम भारत सरकार के फैसले में स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की विशिष्ट  परिस्थितियों में बहुमत राजभवन नहीं, अपितु सदन के भीतर साबित करना होता है, जिसे फ्लोर-टेस्ट भी कहा जाता है।

दस वर्ष पूर्व अक्टूबर 2009 में भी जब 11 वें हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद त्रिशंकु विधानसभा बनने पर तत्कालीन राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया ने कांग्रेस विधायक दल के नेता भूपिंद्र सिंह हुड्डा को 25 अक्टूबर 2009 को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाई थी। राज्यपाल ने उन्हें 31 अक्टूबर 2009 तक सदन में अपनी सरकार का बहुमत साबित करने के निर्देश दिए थे।

हालांकि, हुड्डा ने मुख्यमंत्री की शपथ लेने से पूर्व कांग्रेस पार्टी के 40 नव निर्वाचित सदस्यों के अलावा सात निर्दलीय विधायकों एवं एक बसपा विधायक का हस्ताक्षरित समर्थन पत्र तत्कालीन राज्यपाल महोदय को सौंप दिया था। लेकिन राज्यपाल के निर्देश पर उन्होंने 28 अक्टूबर 2009 को तत्कालीन नवगठित  विधानसभा के पहले ही सत्र में विश्वास मत हासिल करके दिखाया।
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