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बाथरूम में जवान बेटी का खून से लथपथ शव देख मां-बाप बेसुध, असलियत आई सामने

Thu, 05 Apr 2018 10:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद(हरियाणा)
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जींद में लड़की ने सुसाइड की
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जवान बेटी का शव खून से लथपथ बाथरूम में पड़ा मिला, जिसे देखकर मां-बाप बेसुध हो गए। वहीं मामले की असलियत भी सामने आई। घटना हरियाणा के जींद की है। लड़की जज बनना चाहती थी, लेकिन 11वीं में नंबर कम आ गए। इस वजह से वह परेशान रहने लगी और रविवार को पिता की रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली। लड़की ने बाथरूम में जाकर यह कदम उठाया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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पिल्लूखेड़ा थाना प्रभारी समरजीत सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे और फोरेंसिक टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने खून के सैंपल तथा रिवाल्वर को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। उनका कहना है कि फिलहाल मामला आत्महत्या का लग रहा है। बाद में डीएसपी भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया।

गांव सिवाहा के सरपंच वेदपाल कई वर्षों से पिल्लुखेड़ा मंडी में रहते हैं। सुबह वह भिड़ताना गांव गए थे। परिजनों ने उन्हें फोन पर सूचना दी कि उनकी बेटी अंजलि (16) ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली है। इसके बाद वह घर आए और बाथरूम का दरवाजा तोड़ा तो अंदर अंजलि खून से लथपथ पड़ी थी। वेदपाल ने पुलिस को बताया कि अंजलि का शनिवार को 11वीं कक्षा का परिणाम आया था। इसमें उसे 92 प्रतिशत अंक मिले थे, जबकि दसवीं कक्षा में उसके 95 प्रतिशत अंक थे। परीक्षा परिणाम से वह संतुष्ट नहीं थी।
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इंडस स्कूल में पढ़ती थी अंजलि

जींद में लड़की ने सुसाइड की
अंजलि पिल्लूखेड़ा स्थित इंडस स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ती थी। वह तीन वर्ष से इसी स्कूल में पढ़ रही थी। स्कूल के प्राचार्य पवन गुप्ता ने बताया कि अंजलि पढ़ने में तेज थी। उसने इकोनॉमिक्स के साथ मैथ ले रखा था। 11वीं में उसने 92 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। अंजलि ने आत्महत्या क्यों की, यह बात समझ से परे है। वह बहुत मेहनती थी।

न्यायाधीश बनना चाहती थी
अंजलि के पिता वेदपाल ने बताया कि उनके चार बच्चे हैं। अंजलि सबसे बड़ी थी। उसके बाद दो बेटियां और एक बेटा है। उन्होंने अंजलि को डॉक्टर बनाने की सोची थी, लेकिन एक दिन अंजलि ने कहा कि वह न्यायाधीश बनकर आम लोगों को न्याय दिलाएगी। इसके बाद से वह उसके सपनों को पूरा करने में लग गए। समय-समय पर अंजलि के सपने को पूरा करने के लिए विशेषज्ञों की राय भी लेते थे। अंजलि के नाना ने बताया कि अंजलि की मौसी आईएएस के बाद ट्रेनिंग पर है, जो कि गुरुग्राम में तैनात है। समय-समय पर वह अंजलि से बातचीत करती थी।

बच्चों का करें सहयोग
माता-पिता बहुत महत्वाकांक्षी हो गए हैं। बच्चों को मशीन बना रहे हैं। तुरंत रिजल्ट चाहते हैं। इसी कारण बच्चे प्रेशर में रहते हैं। माता पिता अपने बच्चे की असफलता स्वीकार नहीं कर पाते। इस कारण बच्चे परेशान हो जाते हैं। माता-पिता व अध्यापक बच्चों को मनोरोगी विद्वान बनाने की बजाय मुस्कुराते हुए सफल व्यक्ति बताएं, चाहे वह कोई भी काम करें।
- नरेश जागलान, मनोवैज्ञानिक
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