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जेपी गारबेज प्लांटः साढ़े तीन करोड़ रुपये में 150 टन कचरे का ही निस्तारण कर सकेंगी अपग्रेड मशीनें

Sat, 19 Sep 2020 10:36 AM IST
खुशबू गोयल नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़

सार

  • जेपी प्लांट की मशीनों को अपग्रेड करने के लिए एक कंपनी ही आगे आई
  • कोरोना के कारण प्लांट का निरीक्षण करने बाहरी कंपनियां नहीं आ सकीं
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जेपी गारबेज प्लांट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जेपी कचरा निस्तारण प्लांट को अपग्रेड करने के लिए नगर निगम की ओर से मांगे गए आवेदन में सिर्फ एक ही कंपनी ने रुचि दिखाई है। कंपनी के अनुसार मशीनों के अपग्रेडेशन में साढ़े तीन करोड़ खर्च होंगे। उसके बाद मात्र 150 मीट्रिक टन कचरा ही मशीनें निस्तारित कर सकेंगी। बता दें कि जेपी कचरा निस्तारण प्लांट निगम के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है।
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जेपी समूह से प्लांट लेने के बाद इसके संचालन की जिम्मेदारी नगर निगम ने अपने कंधों पर ली थी, लेकिन 70 से 80 मीट्रिक टन कचरा ही मशीनें निस्तारित कर पा रही हैं, जबकि शहर में प्रतिदिन 500 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। शेष कचरे को निगम को मजबूरन डंपिंग ग्राउंड पर फेंकना पड़ रहा है। इससे पहाड़ की ऊंचाई और बढ़ती जा रही है। अब निगम सदन में प्रस्ताव लाकर आगे की प्रक्रिया पर काम करेगा।

हर दो से तीन घंटे में रोकनी पड़ती है मशीन
वर्तमान में कचरे का निस्तारण कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि मशीनों की स्थिति खस्ता हाल है। हर दो से तीन घंटे में मशीन गर्म हो जाती है। उसके बाद मशीन को रोकना पड़ता है। न रोकने की स्थिति में कई बार पट्टे में आग भी लग जाती है। पहले भी प्लांट में कचरे में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में मशीन पर बहुत ज्यादा बोझ नहीं डाला जा सकता है। दिनभर में लगभग 5 घंटे का ब्रेकडाउन होता ही है। 
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रुड़की आईआईटी ने मशीनें बदलने का दिया था सुझाव

जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट की रिपोर्ट नगर निगम को देते हुए रुड़की आईआईटी ने कहा था कि प्लांट की मशीनों को हर हाल में बदलना ही होगा। हालांकि, कचरा निस्तारण की कुछ क्षमता बढ़ाने के लिए निगम को गीला-सूखा कचरा अलग-अलग लेना होगा। रिपोर्ट के अनुसार 2008 में मशीनों को म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के दिशा-निर्देशों के अनुसार लगाया गया था। उसके बाद अब म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट 2016 के दिशा-निर्देश लागू हो चुके हैं। निगम को उसके अनुसार ही कचरे का निस्तारण कराना होगा।

ताजा कचरे के निस्तारण के साथ प्रेशर जेट से करनी होगी सफाई
रुड़की आईआईटी के अनुसार हर सप्ताह मशीनों को प्रेशर जेट से साफ कराना होगा और महीने में एक बार ब्लीचिंग पाउडर से सफाई करनी होगी। 6 से 8 घंटे की सफाई के लिए 8 मजदूर व एक सुपरवाइजर लगेगा। एक मजदूर के एक हजार रुपये के हिसाब से 8 हजार रुपये खर्च आएगा। साथ ही कहा गया है कि मशीनों से केवल ताजा कचरा ही निस्तारित हो ताकि उसकी क्षमता को बरकरार रखा जा सके।
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एनआईटीटीटीआर ने भी मशीनें बदलने का दिया था सुझाव

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर (एनआईटीटीटीआर) ने भी जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट की सभी मशीनों को बदलने के लिए कहा था। एनआईटीटीटीआर ने रिपोर्ट में बताया था कि अभी जो मशीनें लगी हैं, वह काफी पुरानी टेक्नोलॉजी की हैं। इन मशीनों से केवल 15 से 20 प्रतिशत कार्य ही लिया जा सकता है। जो अभी चल रहा है।

12 साल पुरानी हैं मशीनें, अब रिपेयरिंग की भी स्थिति नहीं
एनआईटीटीटीआर की रिपोर्ट में बताया गया था कि मशीनें 12 साल पुरानी टेक्नोलॉजी पर चल रही हैं। इस टेक्नोलॉजी की मशीनों को रिपेयर कराया जाएगा तब भी शत-प्रतिशत कचरा प्रोसेस नहीं कराया जा सकता है, इसलिए मशीनों की रिपेयरिंग पर खर्चा करना ठीक नहीं। पुरानी मशीन होने के कारण बिजली की खपत भी ज्यादा है और कचरा प्रोसेस भी ठीक से नहीं हो रहा है।

फिलहाल कंपनियों से एक एस्टीमेट मांगा गया था। कोरोना के कारण एक ही कंपनी ने प्लांट का निरीक्षण किया है। अभी उसका एस्टीमेट ले लिया गया है। आगे की प्रक्रिया पर जल्द कार्य शुरू किया जाएगा।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम
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