जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मुरथल में सामूहिक दुष्कर्म व राज्य भर में हिंसा को लेकर दर्ज मामलों की जांच के लिए गठित एसआईटी से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि क्या इन मामलों की जांच पूरी हो चुकी है। साथ ही छोटे अपराध व गंभीर अपराधों का अलग-अलग ब्योरा पेश करने का आदेश दिया है।
एमिकस क्यूरी को भी छोटे व कम गंभीर मामलों की कैंसिलेशन रिपोर्ट पर पक्ष रखने का आदेश दिया है। इस मामले में कोरोना काल के चलते लंबे समय तक सुनवाई नहीं हो पाई थी और यह चार साल बाद प्रभावी सुनवाई हुई है। फरवरी 2019 के बाद इस मामले में हाईकोर्ट में कोई ठोस सुनवाई नहीं हो पाई।
मुरथल में सामूहिक दुष्कर्म व राज्य में हिंसा मामले में हाईकोर्ट ने 24 फरवरी 2016 को संज्ञान लेकर इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर जांच का आदेश दिया था। इस मामले में सुनवाई के दौरान ही वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर पर तोड़-फोड़ व वाहनों को जलाने के आरोपी दिलावर सिंह ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी। इस याचिका पर सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि सुप्रीम कोर्ट इन मामलों का ट्रायल दिसंबर 2018 तक पूरा करने का आदेश दे चुका है।
2019 में जब हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी तो बताया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के इन आदेश के बावजूद इन केसों का ट्रायल पूरा नहीं हो पाया है। इस पर हाईकोर्ट ने एसआईटी को ट्रायल कोर्ट में चल रहे मामलों के स्टेटस की जानकारी मामले की अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट को दिए जाने के आदेश दिए थे। साथ ही पूछा है था कि वह बताएं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद ट्रायल पूरा किये जाने में देरी क्यों हो रही है? क्या इस देरी के लिए सुप्रीम कोर्ट में कोई अर्जी दायर कर और समय की मांग की है या नहीं।