जाट हिंसा पर प्रकाश सिंह की रिपोर्ट
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लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान अधिकारियों की लापरवाही और चूक की जांच कर रही प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट मंगलवार को सार्वजनिक कर दी गई।
ठीक एक दिन पहले हाइकोर्ट को यह रिपोर्ट सौंपी गई थी। माना जा रहा है कि पांच जून को दूसरी बार आंदोलन के अल्टीमेटम को देखते हुए रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने का सरकार को फायदा मिल सकता है।
हिंसा और उपद्रव की आग में जल रहे हरियाणा के आठ जिलों का दौरा करने के बाद कमेटी सदस्यों ने 71 दिनों की मशक्कत के बाद रिपोर्ट को अमली जामा पहनाया। इस रिपोर्ट में पुलिस और प्रशासनिक विफलताओं को इस रूप में पेश किया गया है, जिसे देखकर लापरवाही बरतने या अपनी जिम्मेवारियों से भागने वाले अधिकारियों को इस बात का अहसास हो जाएगा कि उन्होंने कहां-कहां गलतियां की और इसकी सजा पा चुके अधिकारियों को इस बात का अहसास होगा कि रिपोर्ट ने जैसी करनी, वैसी भरनी की कहावत को सच साबित कर दिखाया। प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट में इस हिंसा में गैर जिम्मेवार करीब 90 अधिकारियों की लापरवाहियों को सुबूत और साक्ष्यों को परखने के बाद उन्हें आईना दिखाया गया है।
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रिपोर्ट सार्वजनिक करने की विपक्षी लगातार कर रहे थे मांग
इस रिपोर्ट को पेश करने के बाद से विपक्षी अलग अलग तरीके से प्रदेश सरकार पर लगातार निशाना साध रहे थे। लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पहले ही साफ कर दिया था कि हाइकोर्ट में रिपोर्ट पेश करने के बाद इसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। अब तक रिपोर्ट में गैर जिम्मेवार अधिकारियों में से करीब 50 फीसदी पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन जिनपर अब तक नहीं हो सकी है, उनके लिए न तो काम करना आसान होगा और न ही खुद की कमियों पर पर्दा डाल सकेंगे।