जाट आरक्षण को लेकर सोनीपत में महापंचायत
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जाटों को आरक्षण देने के मामले में हरियाणा सरकार ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए बड़ी दलील दी। इसके बाद मामले पर शुक्रवार को सुनवाई 3 अगस्त तक स्थगित कर दी गई। हाईकोर्ट ने इस मामले में जाटों को आरक्षण दिए जाने पर अंतरिम रोक लगा रखी है, जो फिलहाल जारी रहेगी। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा था कि आखिर किन विशेष परिस्थितियों में जाटों को आरक्षण का लाभ दिया गया है।
हरियाणा सरकार की ओर से हाईकोर्ट के सामने पक्ष रखते हुए कहा गया था कि जाटों को किसी प्रशासनिक आदेश के माध्यम से नहीं बल्कि कानून बनाकर आरक्षण दिया गया है। मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए पूर्व के आदेशों के माध्यम से हरियाणा सरकार ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में भौगोलिक क्षेत्र और सांस्कृतिक विभिन्नता है। ऐसे में आरक्षण का खाका पूरे देश में एक जैसा हो यह जरूरी नहीं है।
सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी इस बात को मान चुका है कि यदि किसी समुदाय विशेष को आरक्षण की जरूरत सरकार महसूस करती है तो ऐसी स्थिति में आरक्षण दिया जा सकता है। आरक्षण की अधिकतम सीमा के 50 प्रतिशत होने पर भी हरियाणा सरकार ने आपत्ति जताते हुए कहा कि तमिलनाडु में 69 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है और इस व्यवस्था को कमिशन के माध्यम से लागू किया गया है।
हालांकि, इसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया जा चुका है, लेकिन इसमें सुप्रीम कोर्ट ने रोक नहीं लगाई है। सरकार ने कहा कि हरियाणा सरकार ने भी पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए कानून बनाया और कमिशन का गठन किया। इसके बाद आरक्षण का लाभ दिया गया है, ऐसे में 50 प्रतिशत की सीमा लांघी जा सकती है।