जाट आंदोलन की आग में झुलस रही हरियाणा सरकार आखिरकार एक बार फिर जाटों के आगे झुकी नजर आई। शुक्रवार को चंडीगढ़ में जाटों और चीफ सेक्रेटरी डीएस ढेसी के बीच बातचीत हुई, जिसमें आरक्षण पर सहमति बन गई है।
जाट आरक्षण पर सरकार ने इसी विधानसभा सत्र में बिल पेश करने का वादा किया है। सरकार की तरफ से पक्ष रखा गया कि विधानसभा सत्र में नए संशोधन के साथ बिल पेश होगा। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा, यदि 3 अप्रैल तक फैसला नहीं होता तो आगे की रणनीति बनाएंगे। जाट नेताओं ने बीसी-बी कोटे के तहत आरक्षण की मांग की, सात मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा था। इनमें मृतकों के परिवार को 10 लाख मुआवजा, एक नौकरी, गलत मुकदमे वापस लेने जैसे 7 मुद्दे थे।
बैठक में जाटों ने कहा कि सरकार आरक्षण के दौरान बनाए गए मामले वापस ले। इस मसले पर सरकार विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को मीटिंग में आने से पहले ही जाट समझौते के मूड में थे। यहीं वजह रही कि सरकार से बातचीत के दौरान जाट प्रतिनिधियों ने सकारात्मक रवैया बनाए रखा। शुक्रवार को मीटिंग में जाटों को प्रस्ताव का प्रारुप भी दिखाया, जिसे सरकार विधानसभा में पेश करेंगी। हालांकि, इस बैठक हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर नहीं थे। गौर हो कि पिछले महीने राज्य में हिंसा के दौरान 30 लोगों की मौत हुई थी।
दोबारा आंदोलन को लेकर सरकार सतर्क
हरियाणा जाट आरक्षण मुद्दा
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हरियाणा के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) पीके दास ने कहा है कि हमें सूचना मिली है कि जाट आंदोलनकारी कई जगहों पर इकट्ठा हो सकते हैं। वहीं, मंत्री अनिल विज ने कहा- "हम जाट बिल जरूर लाएंगे। जाट बंधुओं से कहना चाहता हूं कि धमकियां देना बंद करें।"
अनिल विज के बयान पर केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने बयान दिया है कि सरकार यदि बात न सुने तो अल्टीमेटम दिया जाता है। उन्होंने मंत्रियों को भी मीठी भाषा इस्तेमाल करने की सलाह दी। इस बीच, आंदोलन दोबारा खड़ा होने की आशंका के चलते सरकार ने प्रदेशभर में सुरक्षा बढ़ाने के ऑर्डर दिए हैं।
क्या हैं जाटों की नई मांगें?
जाट समाज की मांग है कि उन्हें हरियाणा और केंद्र में ओबीसी में शामिल किया जाए। पिछले महीने हुए आंदोलन के दौरान गोली चलाने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी दी जाए। आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं। आंदोलन के दौरान गिरफ्तार लोगों को तुरंत रिहा किया जाए। सांसद राजकुमार सैनी को उनके विवादास्पद बयान के लिए गिरफ्तार किया जाए।