जाट आरक्षण आंदोलन के बाद हुए उपद्रव को एक माह बीतने वाला है। बृहस्पतिवार को रोहतक में एक बार फिर से भारी फोर्स और तनाव दिखा। दिन भर जाट भवन पर पुलिस-प्रशासन के साथ-साथ जनता की निगाहें टिकी रही। आंदोलन होगा या नहीं। दोबारा से जाम लगेगा या नहीं, सभी इसी सवाल का जवाब ढूंढते नजर आए।
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हालांकि देर शाम आंदोलन की स्थिति तो स्पष्ट हो गई, लेकिन जाट भवन में पहुंची युवाओं की उग्र भीड़ के सामने आयोजक पूरी तरह बेबस नजर आए। हालांकि किसी तरह पुलिस-प्रशासन और जाट नेताओं ने हालात और भीड़ पर काबू रखा। 72 घंटे का अल्टीमेटम खत्म होता देख बृहस्पतिवार सुबह से ही भीड़ का रुख जाट भवन की ओर हो गया था। यहां चल रहे धरने के आयोजकों ने भीड़ को समझाना चाहा।
उन्हें आश्वासन दिया कि जल्दबाजी में कोई भी फैसला लेना गलत होगा। भीड़ इतने गुस्से में थी कि उन्होंने आयोजकों की कोई बात नहीं मानी। भीड़ को बार-बार उग्र होता देख बाहर खड़े पुलिस-प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ती जा रही थीं। सभी को डर सता रहा था कि यदि पहले की भांति आंदोलन नेतृत्वहीन हो गया तो स्थिति कहीं काबू से बाहर न हो जाए।
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आयोजकों को नकार भीड़ चक्का जाम की घोषणा कर बाहर निकली तो शहर में अफवाहों का दौर भी शुरू हो गया। जाट भवन के बाहर खड़ी फोर्स ने भी मोर्चा संभाल लिया। हालांकि समय रहते खाप प्रतिनिधियों और युवा जाट नेताओं ने स्थिति को संभाल लिया। अन्यथा पिछले माह वाले हालात होने पर ज्यादा समय नहीं लगता।
हर स्थिति से निपटने को तैयार रही फोर्स
हरियाणा जाट आरक्षण मुद्दा
- फोटो : अमर उजाला
जाट भवन में दिन भर विवादास्पद स्थिति बनी रही। गुस्साई भीड़ की एक ही मांग थी कि शुक्रवार से चक्का जाम किया जाए। खाप प्रतिनिधि व जिम्मेदार लोग भीड़ को समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन कोई किसी की नहीं सुन रहा था। फोर्स ने जाट भवन को चारों तरफ से घेर रखा था। डीएसपी बिजेंद्र सिंह और सीटीएम मनोज खत्री समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। किसी तरह धीरे-धीरे भीड़ कम हुई और अधिकारियों ने राहत की सांस ली।
नारों से गूंजता रहा जाट भवन, अधिकारियों की थम रही थी सांसे
जाट भवन में एक समय ऐसा था कि फोर्स बाहर मोर्चा संभाले हुए थी तो अंदर बैठक में बार-बार जाट एकता के नारे गूंज रहे थे। कई घंटे तक यह सब चलता रहा। नारा लगते ही फोर्स सतर्क हो जाती। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार लग रहा था कि नारे लगाते ही कभी भीड़ सड़क पर न उतर जाए और कोई बवाल खड़ा न हो जाए। इसलिए हर हालात से निपटने की तैयारी थी।
यूनिवर्सिटी-कॉलेजों के हॉस्टल खाली
17 से 19 मार्च तक जिले के कॉलेज और एमडीयू में शैक्षणिक विभाग बंद कर दिए गए हैं। हालांकि परीक्षाएं बदस्तूर जारी रहेंगी। बृहस्पतिवार को जैसे ही जाट भवन की स्थिति बिगड़ती दिखाई दी तो यूनिवर्सिटी और कई कॉलेजों में हॉस्टल खाली करा दिए गए। हालांकि इसके लिए प्रबंधन की तरफ से कोई अधिकारिक आदेश नहीं दिया गया, लेकिन हॉस्टलों में रहने वाली छात्राओं को मौखिक तौर पर सुरक्षा का हवाला देते हुए घर भेज दिया गया है।
महिलाओं ने पुलिस अधिकारियों को घेरा
जाट भवन में बैठक के बाद भीड़ बाहर निकली तो उसके कुछ देर बाद ही वहां पर कुछ महिलाओं ने आकर पुलिस अधिकारियों का घेर लिया। एक महिला का कहना था कि पुलिस उसके दो बेटों को उठाकर ले गई। डीएसपी ने आश्वासन दिया कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। इसका पता किया जाएगा।
टिटौली में कई गांवों की पंचायत, खापों की कमेटी पर छोडा फैसला
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जाट भवन के अलावा बृहस्पतिवार को टिटौली गांव में भी दर्जन से अधिक गांवों के गणमान्य लोगों की पंचायत हुई। पंचायत में फैसला हुआ कि खापों की कमेटी जो भी फैसला लेगी, उसी के अनुसार आंदोलन होगा। टिटौली में हुई पंचायत में फिलहाल शुक्रवार से कोई आंदोलन नहीं करने का फैसला लिया गया।
टिटौली गांव के पंचायत घर में सुंदरपुर, सिंहपुरा, ससरौली, भगवतीपुर, टिटौली और जिंदरान के अलावा दूसरे कई गांवों के गणमान्य लोगों की पंचायत हुई। अध्यक्षता कर रहे 84 खाप प्रधान हरदीप अहलावत ने बताया कि जाट शांतिपूर्वक तरीके से अपना आंदोलन करेंगे। पिछले दिनों जो भी हुआ, उसमें साजिश के तहत जाटों को शिकार बनाया गया।
पंचायत में निर्णय हुआ कि रोहतक, सोनीपत और झज्जर जिले के खाप प्रतिनिधियों की जो कमेटी गठित हुई है, उसके फैसले के बाद ही आंदोलन किया जाएगा। शुक्रवार से कोई भी आंदोलन नहीं करेगा। इस पर सभी ने अपनी सहमति जता दी। पंचायत में प्रताप ठेकेदार, धनपत प्रधान, चांदराम, महेंद्र प्रधान और जयराम मौजूद रहे।