जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान उपद्रव में मारे गए सभी तीस लोगों के परिवारों को आर्थिक मदद और एक भी सदस्य को सरकारी नहीं देने से जाट संगठन खफा है। सरकार ने करीब दो माह पहले चंडीगढ़ में जाट व खाप नेताओं के साथ बातचीत में मृतकों के परिवारों को दस-दस लाख रुपये और एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन अभी तक छह परिवारों को ही दस-दस लाख रुपये दिए गए हैं। इनमें से चार रोहतक और दो झज्जर से हैं। हिसार के एक परिवार को तो एक लाख रुपये दिए गए हैं।
ताज्जुब है कि अभी तक किसी परिवार के सदस्य को नौकरी नहीं दी गई है। उपद्रव में लिप्त जाट युवाओं की गिरफ्तारी और मुआवजा व नौकरी नहीं देने से जाट संगठनों में रोष हैं और जेल भरो आंदोलन पर उतरे हैं। उधर प्रशासन का दावा है कि पूरी जांच के बाद मृतकों में से कोई निर्दोष पाया जाता है तभी उसके परिवार को मुआवजा दिया जाएगा। जाटों के जेल भरो आंदोलन से उनकी मंशा साफ हो रही है कि वे दोषियों की गिरफ्तारी में बाधा डाल रहे हैं, इसलिए सरकार ने ऐसा करने और जनता को भड़काने वाले नेताओं की संपत्ति का रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश दिए हैं ताकि इनसे नुकसान की भरपाई की जा सके। गौरतलब है कि फरवरी में हुए उपद्रव के दौरान तीस लोगों की मौत हुई थी। इनमें झज्जर के 13, सोनीपत के 8, रोहतक के 5, जींद के दो, हिसार व कैथल का एक-एक व्यक्ति शामिल है।
मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख और एक सदस्य को नौकरी देने की गई थी घोषणा
जाट आंदोलन
- फोटो : amar ujala
प्रदेश में गत 24 फरवरी को सरकार ने जाटों को आरक्षण देने की घोषणा कर आंदोलन समाप्त करवाया था। वादा पूरा नहीं करने पर जाट संगठनों ने 16 मार्च को प्रदेश बंद का आह्वान किया था। इस पर सरकार ने जाट और खाप नेताओं को चंडीगढ़ में वार्ता के लिए बुलाया।
इस दौरान सहमति बनी थी कि मृतकों के परिवारों को दस-दस लाख रुपये और किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी, लेकिन अब तक महज छह परिवारों को सहायता राशि मिल पाई है। इसे लेकर जाट संगठनों में रोष है और रोहतक व जींद में एक मई से जेल भरो आंदोलन कर रहे हैं। उधर सर्वजातीय सर्वखाप ने भी जून में उग्र आंदोलन की चेतावनी दे रखी है।
सीएम कह चुके हैं दोषियों को नहीं देंगे मुआवजा
मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर कह चुके हैं कि जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उस मृतक के परिवार को मुआवजा और नौकरी नहीं देंगे। सरकारी मदद केवल निर्दोष लोगों के परिवारों को ही मिलेगी।
आयोग कर रहा है जांच
जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा, लूटपाट एवं आगजनी की जांच जम्मू एवं कश्मीर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे एसएन झा की अध्यक्षता में 2 सदस्यीय न्यायिक आयोग कर रहा है। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एनसी पाधी भी आयोग में सदस्य हैं। आयोग आंदोलन के दौरान 18 से 23 फरवरी के बीच रोहतक, झज्जर, सोनीपत, जींद, हिसार, कैथल और भिवानी में हुई निजी एवं सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान सहित नहरें, रेलवे स्टेशन, पुलिस स्टेशन, अवैध रूप से पेड़ों को काटकर रास्तों को बंद करने और मानवाधिकार का हनन से संबंधित सभी घटनाओं और उसके तथ्यों व परिस्थितियों की जांच कर रहा है।
इन मृतकों के परिवारों को मिला मुआवजा
भिवानी में हरियाणा जाट सर्व खाप पंचायत
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रोहतक में प्रशासन ने चार मृतकों रवींद्र निवासी बोहर, मनजीत निवासी करतारपुरा, नितिन निवासी बाबरा मोहल्ला, प्रदीप निवासी भराण, महम को 10-10 लाख रुपये की मुआवजा राशि वितरित कर दी है। अभी तक नौकरी के संबंध में कोई भी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। झज्जर में शाम सिंह पुत्र देवी सिंह और कृष्ण पुत्र बख्तावर (दोनों सैनी जाति) निवासी छावनी मोहल्ला के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। परिजनों ने नौकरी के लिए फाइल जिला प्रशासन को सौंप दी है। हिसार में हांसी उपखंड के लालपुरा गांव में उपद्रवियों ने सोनू गुर्जर को गोली मार दी थी। उसके परिवार को प्रशासन से एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली, अन्य कोई राहत नहीं दी गई। सोनीपत, जींद और कैथल के किसी भी मृतक के परिवार को कई सहायता राशि अब तक नहीं मिली है।
अभी तक की जांच
-पुलिस ने आंदोलन के दौरान उपद्रव फैलाने वालों के खिलाफ करीब 2125 एफआईआर दर्ज की हैं।
-अभी तक 485 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और जांच की जा रही है।
-आधे से ज्यादा 1210 मामले रोहतक में दर्ज किए गए हैं और करीब 120 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
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आरक्षण आंदोलन के दौरान उपद्रव में मौत होने पर जिस किसी को मुआवजा दिया गया है, उन सभी के नाम चंडीगढ़ से आए थे। इसके साथ ही उनकी नौकरी की प्रक्रिया भी शासन स्तर पर चल रही है और जिस तरह की कार्रवाई होगी, वहीं से होगी।
-अतुल कुमार, डीसी रोहतक