धार्मिक अनुष्ठानों, मंत्रोच्चारण और आमंत्रित अतिथियों के बीच छह दीक्षार्थियों को दीक्षा देने के साथ ही तीन दिवसीय जैनेश्वरी दीक्षा समारोह संपन्न हो गया। दीक्षा ग्रहण करने वालों के परिवार के सदस्य और दोस्त भी पहुंचे थे। वे सभी उन्हें अपने कंधों पर उठाकर दीक्षा स्थल तक सजे परिधानों में सजाकर ला रहे थे।
सेक्टर-27 स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में रविवार को कार्यक्रम सुबह से देर शाम तक चलता रहा। दीक्षार्थी स्थापन, चौक पूजा, केश लोचण के बाद छह दीक्षार्थियों सुमित भैया, ऋषभ भैया, कमल भैया, सुशील भैया, सुनील भैया और कुसुम दीदी को जैन समाज के धर्म गुरु परम पूज्य श्रमणाचार्य सुंदरसागर महाराज ने दीक्षा प्रदान की।
महाराज ने दीक्षा देने के बाद पिंछी (संयम का उपकरण), कमंडल (शुद्धि का उपकरण) और शास्त्र (ज्ञान का उपकरण) प्रदान कर सभी को मोक्ष की राह पर प्रवेश दिलाया। इस अवसर पर समस्त उत्तर भारत के जैन अनुयायियों ने शिरकत की।
श्री दिंगबर जैन मंदिर के अध्यक्ष धर्म बहादुर जैन ने बताया कि चंडीगढ में यह मौका था जब दीक्षा समारोह आयोजित की गई। दीक्षा प्राप्ति के बाद अब दीक्षार्थी अपने घर और परिवारों को त्याग कर आचार्य सुंदरसागर की छत्रछाया में रहेंगे और जैन धर्म के विस्तार और प्रचार में देश भर का भ्रमण करेंगे।
इन्होंने ली दीक्षा...
जैनेश्वरी दीक्षा समारोह
- उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रहने वाले कमल भैया (85) भारतीय जीवन बीमा निगम में अफसर थे। वे 1990 में रिटायर हो गए। ग्रेजुएट कमल भैया की तीन बेटी हैं। एक बेटी अमेरिका और एक मेरठ में रहती है, जबकि बेटा बिजनेसमैन है।
- 46 वर्ष के सुमित भैया बाल ब्रह्मचारी हैं। मध्यप्रदेश के अंबा के रहने वाले सुमित ग्रेजुएट हैं। धनी परिवार से होने के अलावा वे कवि भी हैं। इनके भाई भी इसी मार्ग में हैं।
- सुनील भैया(53) पेशे से व्यापारी छठी कथा तक पढ़ाई की है। नजफगढ़ दिल्ली के रहने वाले हैं।
- ललितपुर उत्तर प्रदेश के रहने वाले 69 वर्ष के ऋषभ भैया हाईस्कूल पास हैं। जब कैंसर से पीड़ित थे, तब वे करवट भी नहीं बदल पाते थे। अब 10 किलोमीटर पैदल चलते हैं।
- 73 वर्ष के सुशील भैया उत्तर प्रदेश के शामली के रहने वाले हैं और ये व्यापारी हैं।
- 70 वर्षीय कुसुम दीदी गृहिणी हैं। इनका बड़ा परिवार है। शामली की रहने वाली कुसुम दीदी सुशील भैया की पत्नी हैं।
नाम के साथ जीवन भी बदल गया
जैनेश्वरी दीक्षा समारोह
नाम के साथ जीवन भी रविवार से छह लोगों का बदल गया। पति मुनि तो पत्नी छुल्लिका बन गई। मोह का त्याग कर मोक्ष के मार्ग पर प्रस्थान कर गए। अब वे एक दूसरे से नहीं मिल पाएंगे। उन्हें देखने के लिए इनके परिवार और दोस्त भी शामिल हुए थे। सुनील भैया और कुसुम दीदी दोनो पति पत्नी हैं। उत्तर प्रदेश के शामली के रहने वाले हैं। 73 वर्ष के हैं। उनकी पत्नी कुसुम 70 वर्ष की। उनके परिवार और दोस्त भी समारोह में आए।
सुशील जैन के दोस्त सुशील जैन कुकु भी पहुंचे। समारोह के संपन्न होने के बाद उनसे अमर उजाला ने बात की तो प्रवीण जैन ने कहा ताई ने मां से भी अधिक प्यार दिया। अब दुनिया का ख्याल रखेंगी। यह कहते ही प्रवीण जैन के आंखों में पानी भर आया। सुशील जैन कुकु ने कहा कि मेरा दोस्त घड़ी भी अपने हाथों ठीक करता है। अब मेरा गुरु बन गया। शामली स्थित आदिनाथ जिनायल के अध्यक्ष थे। इस्तीफा देकर आए हैं।
हमारा सौभाग्य है कि हमारा दोस्त महाराज बन गया। शामली से आए आशा जैन, मधु जैन, कुमकुम जैन, कमलेश जैन सुभाष जैन ने सुबह से शाम तक कार्यक्रम स्थल पर बैठे रहे। शामली से बस में भरकर कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए थे। कमल भैया छुल्लक बने हैं। ये रामपुर उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। रामपुर से आए डॉ ज्ञानेंद्र कुमार जैन, दिनेश जैन खंडेलवाल, मीना जैन, डॉ प्रदीप कुमार जैन, राकेश कुमार जैन, दिनेश जैन सेठी, कस्तूर जैन सहित बहुत लोग पहुंचे।