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इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हुए विशेष ध्यान में रखें ये 6 बातें

Sun, 03 Jul 2016 08:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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income tax - फोटो : income tax
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अगर आप इनकम टैक्स पेयर्स हैं और अब तक आपने रिटर्न फाइल नहीं की है तो इन 6 बातों का खासतौर से ध्यान रखें। पहली बात कि इनकम टैक्स विभाग से कोई भी आय छिपाने की भूल न करें। चार्टटेड अकाउंटेंट गौरव सूद के अनुसार विभाग इनकम टैक्स चुकाने वालों की पूरी साल की कमाई और ट्रांजेक्शन पर पूरी नजर रखती है।
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जहां आपने इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) में कोई आय छिपायी, वहीं विभाग इसे फौरन पकड़ लेगा और आपको नोटिस भेज देगा। इसलिए समझदारी इसी में है कि नोटिस आए उससे बेहतर है पूरे साल होने वाली सभी तरह की आय की पूरी डिटेल दें। गौरव सूद बता रहे हैं इनकम टैक्स फाइल करते समय कौन सी बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए।

एफडी के ब्याज पर टैक्स छूट नहीं
सीए गौरव के अनुसार टैक्स पेयर्स को आईटीआर में एफडी पर मिलने वाले ब्याज की पूरी जानकारी देनी चाहिए। ऐसा न करने पर विभाग नोटिस भेज देता है। उनके अनुसार लोगों में गलतफहमी होती है कि, बैंक एफडी से मिलने वाले ब्याज की रकम अगर 10,000 रुपये से कम है तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा।
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ऐसे में उन्हें पता होना चाहिए कि 80टीटीए के तहत ब्याज को टैक्स से जो छूट मिली हुई है, वह सेविंग्स अकाउंट्स पर लागू होती है। इसका मतलब यह है कि फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) और रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) से अगर कोई आमदनी हो रही है तो उस पर टैक्स लगेगा।

टैक्स सेविंग बॉन्ड की जानकारी देना जरूरी

भारत में सिर्फ 5430 लोग ही एक करोड़ रुपए से अधिक का आयकर देते हैं। - फोटो : BBC
टैक्स सेविंग इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड्स पर मिलने वाले ब्याज की जानकारी जरूर दें। बेशक बॉन्ड से टैक्स बचाने में मदद मिलती है, लेकिन इससे मिलने वाले ब्याज की जानकारी रिटर्न में देना जरूरी है। सीए गौरव के अनुसार ज्यादातर लोगों में यह धारणा होती है कि अगर बैंक ने टीडीएस काट लिया है तो उस इनकम की जानकारी रिटर्न में देने की जरूरत नहीं है।

हालांकि, टीडीएस सिर्फ 10 फीसदी होता है। अगर आप 20 या 30 फीसदी वाले टैक्स स्लैब में आते हैं तो आपको इस इनकम पर अतिरिक्त कर चुकाना होगा। अगर किसी की इनकम बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट से कम है तो इन्वेस्टर के रिटर्न फाइल करने के बाद विभाग उसे टीडीएस रिफंड करता है।

प्रॉपर्टी पर नजर
गौरव के अनुसार अगर कोई अपनी आमदनी इसलिए छिपाता है कि टैक्स न देना पड़े तो टैक्सपेयर मुश्किल में फंस सकता है। टैक्स फॉर्म्स में प्रॉपर्टी के बारे में डिक्लेयरेशन के लिए अलग कॉलम होता है। अगर आपके पास एक से ज्यादा प्रॉपर्टी है तो आपको रिटर्न में इसकी जानकारी देनी होगी। वैसे भी 50 लाख रुपये से अधिक की प्रॉपर्टी पर टीडीएस लगता है।

इसलिए जब आप प्रॉपर्टी बेचेंगे और उस पर लॉन्ग टर्म गेंस का इंडेक्सेशन बेनेफिट क्लेम करेंगे या टीडीएस रिफंड का दावा करेंगे तो टैक्स डिपार्टमेंट आपसे यह सवाल कर सकता है कि आपने इसकी जानकारी पहले रिटर्न में क्यों नहीं दी थी। वहीं अगर यह प्रॉपर्टी रेंट पर दी गई है तो रेंटल इनकम की जानकारी रिटर्न में देनी पड़ेगी और उस पर टैक्स चुकाना होगा। अगर प्रॉपर्टी खाली है तो मालिक को उससे होने वाली नेशनल इनकम पर टैक्स देना पड़ेगा। इस तरह के मामलों में रेंट मौजूदा मार्केट रेट के हिसाब से लगेगा।
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विदेशी संपत्ति का खुलासा जरूर करें

टैक्स - फोटो : Demo
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट विदेश में खरीदी गई संपत्ति पर खास नजर होती है। इसलिए अगर आपने विदेश में कोई संपत्ति ली है तो उसका उल्लेख आईटीआर में जरूर करें। क्योंकि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट भारत के बाहर मौजूद खातों और संपत्तियों पर कड़ी निगरानी रखता है।

नए आईटीआर-2 फॉर्म में आपको अपने फॉरन बैंक अकाउंट का होल्डिंग स्टेटस, खाता खोलने की तारीख, संबंधित साल से जुड़े ब्याज आदि की जानकारी देने की जरूरत पड़ेगी। साथ ही न सिर्फ फॉरन बैंक अकाउंट्स बल्कि घरेलू बैंक अकाउंट्स की भी जानकारी देनी पड़ेगी। सीए गौरव के अनुसार टैक्सपेयर के लिए रिटर्न में अपने सभी बैंक अकाउंट्स की जानकारी देना जरूरी होता है। अगर आप इसमें चूक जाते हैं, तो यह जानकारी छिपाने का मामला बनता है।

पारिवारिक सदस्यों के नाम पर निवेश
गौरव बताते हैं कि आयकर नियमों के तहत अगर कोई पत्नी या बच्चों के नाम पर निवेश करता है तो उससे होने वाली आय आपकी मानी जाएगी और उसके अनुसार ही उस पर टैक्स लगेगा। इसे विभाग जिसके नाम पर निवेश है उसकी आय नहीं मानेगा, यह निवेश करने वाली की आय होगी। उसे ही अपनी आईटीआर में इसकी जानकारी देनी होगी।
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