मोहाली जिला 2006 अप्रैल में अस्तित्व में आया था। पंजाब का यह 18वां जिला था। इस जिले में तीन विधानसभा हलके पड़ते हैं। इनमें खरड़, मोहाली और डेराबस्सी शामिल हैं। तीनों हलकों में करीब छह लाख से अधिक वोटर हैं।
2012 में इन हलकों में पहली बार विधानसभा चुनाव हुआ था। जिसमें खरड़ और मोहाली से कांग्रेस के उम्मीदवार विजयी रहे थे। जबकि डेराबस्सी से शिरोमणि अकाली दल ने बाजी मारी थी।
इससे पहले मोहाली खरड़ विधानसभा हलके का हिस्सा था। जबकि डेराबस्सी बनूड़ विधानसभा हलके में पड़ता था। बनूड़ अकाली दल का गढ़ माना जाता था।
यहां से दिवंगत अकाली नेता कैप्टन कंवलजीत सिंह कई बार चुनाव जीते और राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। इसी तरह खरड़ हलका कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है।
1997 के बाद से अब तक शिअद इस इलाके में अपनी जीत दर्ज नहीं करवा सका। इससे पहले शिअद, कांग्रेस व बीएसपी यहां से जीतते रहे हैं।
दिवंगत नेता की पत्नी और पत्रकार पर सबकी निगाहें
election
- फोटो : demopic
खरड़ पंजाब के सबसे बड़े विधानसभा हलकों में से एक माना जाता है। वहीं, इस बार तीन हलकों में टक्कर शिअद, कांग्रेस और पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी में मानी जा रही है।
मोहाली से जहां शिअद ने सीनियर अकाली नेता सुखदेव सिंह ढींढसा के दामाद व पूर्व नौकरशाह तेजिंदर पाल सिंह सिद्धू को मैदान में उतारा है। वहीं, कांग्रेस ने दो बार चुनाव जीत चुके बलबीर सिंह सिद्धू पर दांव खेला है।
जबकि आम आदमी पार्टी राजनीतिक पृष्ठभूमि रखने वाले नरिंदर सिंह को परख रही है। वहीं, खरड़ में कांग्रेस ने मौजूदा विधायक जगमोहन सिंह कंग पर भरोसा दिखाया है।
शिअद ने बिल्डर रणजीत सिंह गिल के रूप में नया चेहरा मैदान में उतारा है। जबकि आप वरिष्ठ पत्रकार कंवर संधू के सहारे अपनी नैया पार लगाने में जुटी है। इस तरह डेराबस्सी हलके से शिअद ने मौजूदा विधायक एनके शर्मा को फिर से टिकट दिया है।
जबकि आप ने दिवंगत शिअद नेता कैप्टन कंवलजीत की पत्नी सरबजीत कौर पर दांव खेला है। वहीं, कांग्रेस ने दीपइंदर सिंह ढिल्लों को अपना उम्मीदवार बनाया है।