कांग्रेस की सत्ता वापसी या भाजपा की हैट्रिक... हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे आज आ जाएंगे। चुनाव में इस बार जमीनी मुद्दे गाैण ही रहे। विकास, सड़क और पानी जैसे जनता से जुड़े मुद्दे न नेताओं ने उठाए और न ही जनता ने ध्यान दिया। आइए जानते हैं कि इस बार चुनाव में काैन से मुद्दे हावी रहे।
बेरोजगारी
भाजपा पर्ची-खर्ची के मुद्दे को लेकर चुनावी मैदान में उतरी थी। भाजपा प्रचार के दौरान दावा करती आई है कि हरियाणा की पूर्व हुड्डा सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान करीब 85 हजार सरकारी नौकरियां दी थी, जबकि भाजपा सरकार ने अपने दस साल के कार्यकाल के दौरान कांग्रेस से दो गुनी एक लाख 47 हजार सरकारी नौकरियां दी हैं। भाजपा ने बिना पर्ची-बिना खर्ची नौकरी देने का चुनावी नारा भी दिया। वहीं, कांग्रेस ने बेरोजगारी के ही मुद्दे को उठाकर युवाओं से वोट मांगे। राज्य में 18 से 39 साल के युवाओं के करीब 94 लाख मतदाता हैं।
किसान आंदोलन
भाजपा की 10 साल की सरकार के दाैरान दो बड़े किसान आंदोलन हुए। पहला आंदोलन तीन कृषि कानूनों के खिलाफ कुंडली बाॅर्डर पर हुआ। इसके बाद फरवरी 2024 में पंजाब के किसानों ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली कूच का एलान किया। हरियाणा में उन्हें शंभू समेत कई बाॅर्डर पर रोक लिया गया। इसके बाद से किसानों ने वहां पक्के मोर्चे लगा दिए हैं। हरियाणा के किसान संगठनों ने भी पंजाब के किसान संगठनों का साथ दिया। हालांकि भाजपा ने डैमेज कंट्रोल की पूरी कोशिश की। 24 फसलों को एमएसपी पर खरीदने का एलान किया है। वहीं, कांग्रेस ने एमएसपी पर कानून बनाने का वादा किया है। हरियाणा में 60 फीसदी से ज्यादा विधानसभा सीटें ग्रामीण इलाकों में हैं। ऐसे में चुनाव नतीजों पर किसान आंदोलन का पूरा प्रभाव रहेगा।
अग्निवीर
हरियाणा में सैनिकों के मुद्दे पर सियासत गर्म है। सत्ता पक्ष इस योजना को सुधार और सेना व सैनिकों की बेहतरी के लिए उठाए गए कदम के रूप में पेश कर रहा है, वहीं, विरोधी दल कांग्रेस अग्निपथ योजना के मुद्दे पर लगातार केंद्र और प्रदेश की सरकार को घेर रही है। लोगों में भी अग्निपथ योजना को लेकर गुस्सा है। वे कहते हैं कि इस योजना ने युवाओं में हीन भावना पैदा की है। सैनिकों में भी एक अलग श्रेणी हो गई है। सरकार नहीं चेती तो नुकसान तय है।
पहलवान आंदोलन
कुश्ती संघ के अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण के खिलाफ हरियाणा के पहलवानों विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक ने दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए आंदोलन शुरू किया था। दिल्ली में धरना दिया गया। पहलवानों ने अपने मेडल तक गंगा में बहा दिए। इस मुद्दे को कांग्रेस ने लपका और भाजपा पर महिला और पहलवान विरोधी होने का आरोप लगाया। इस बार कांग्रेस ने पहलवान विनेश फोगाट को जुलाना से बताैर प्रत्याशी मैदान में उतारा है।
ओल्ड पेंशन स्कीम
हरियाणा में इस बार ओल्ड पेंशन स्कीम भी बड़ा मुद्दा बना। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में ओपीएस देने की घोषणा की है। प्रदेश में सरकारी कर्मचारी, लंबे समय से इसके लिए आंदोलन कर रहे हैं। हरियाणा में लगभग 2.71 लाख सरकारी कर्मचारी हैं। इसके अलावा 1.55 लाख से अधिक पेंशनर्स हैं।