कमजोर केस का अपराधियों को मिलता है फायदा
आला अधिकारियों के अनुसार, नशा तस्करी के मामले में पकड़े गए आरोपियों और नशे की मात्रा में धारा 55 के तहत कार्रवाई की जाती है। चूंकि आरोपियों और उनसे बरामद नशे को अदालत में पेश करना होता है, ऐसे में जांच पूरी होने के बाद थाना प्रभारी उस पर अपने हस्ताक्षर करते हैं। ताकि केस के सभी साक्ष्य स्पष्ट रहें। लेकिन कई मामलों में थाना प्रभारियों के हस्ताक्षर ही नहीं मिले। इससे केस अदालत में कमजोर हुआ और अपराधी बरी हो गए।
इस तरह की विभागीय जांच से टूटता है मनोबल
इस तरह की कार्रवाई पर एक थाना प्रभारी का कहना है कि थाना प्रभारियों की दिनचर्या काफी व्यस्त होती है। उन्हें इस तरह की जांच पूरा करने का समय नहीं मिल पाता। इस कारण कई बार जांच अधूरी रह जाती है। उनकी जगह थाने में तैनात अन्य कोई अधिकारी अपने स्तर पर इसकी जांच पूरी करता है। यही नहीं, कई बार थाना प्रभारी के छुट्टी पर होने के कारण भी दूसरे अफसर हस्ताक्षर कर देते हैं। इस तरह की जांच से थाना प्रभारियों का मनोबल टूटता है।
नशा तस्करी के केसों में लापरवाही बरतने पर छह थाना प्रभारियों के खिलाफ विभागीय जांच खोली गई है। जल्द ही सारी सच्चाई सामने आएगी। सभी से इस बारे में पूछताछ की जाएगी। -कुलदीप सिंह चहल, एसएसपी, चंडीगढ़