- नए कृषि सुधार कानूनों से आएगी किसानों के जीवन में समृद्धि, विघटनकारी और अराजकतावादी ताकतों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार से बचें, सच जानें और देशभर के किसान इनके एजेंडे से सतर्क रहें।
- सरकार ने पिछले वर्ष 279.91 लाख मीट्रिक टन की तुलना में इस वर्ष 336.67 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदा है। इससे करीब 33 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं और उन्हें 63563 करोड़ से अधिक का भुगतान हुआ है। कुल खरीद में पंजाब का योगदान 60 प्रतिशत से अधिक रहा।
- किसानों को व्यापारियों, कंपनियों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों व निर्यातकों से जोड़ा जाएगा।
- कांट्रैक्ट फार्मिंग के माध्यम से बुआई से पूर्व ही किसानों को उसकी उपज के दाम निर्धारित किए जाएंगे।
- बुआई से पूर्व किसान को मूल्य का आश्वासन, दाम बढ़ने पर न्यूनतम मूल्य के साथ अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
- सोशल मीडिया पर ऐसे किसान नेताओं के वीडियो वायरल किए जा रहे हैं, जो इस नई व्यवस्था को किसानों के हित में बता रहे हैं।
- टपका सिंचाई प्रणाली में किसानों को 85 से 100 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है।
- हैफेड के आउटलेट पर किसानों के उत्पादक बेचे जाएंगे, मत्स्य पालन, सूकर पालन, पशु पालन व बागवानी संबंधी योजनाओं में किसानों को भारी अनुदान दिया जाएगा।
कृषि संबंधी योजनाएं और कृषि कानून को लेकर सरकारी दलीलें अलग बात हैं। मगर किसानों का आंदोलन कृषि कानूनों को वापस कराने को लेकर है। किसान नेताओं ने केंद्र सरकार के संशोधन प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। सभी किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को रद्द कराने और एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) गारंटी कानून लागू करवाने पर अडिग हैं। - अभिमन्यु कोहाड़, प्रवक्ता, राष्ट्रीय किसान महासंघ।