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...आखिर 36 लाख सिखों का सवाल है

Mon, 07 Jul 2014 09:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल
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हरियाणा के गुरुद्वारों के रखरखाव के लिए अलग कमेटी की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब सफलता की ओर बढ़ता दिख रहा है। सरकार सिखों की मांग के प्रति ईमानदारी का दंभ भर रही है तो अकाली नेता इसे महज चुनावी स्टंट बता रहे हैं। प्रदेश में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुई इस घोषणा का चुनाव पर असर पड़ना लाजमी भी है।
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दो बार चुनावी घोषणा पत्र में इस मांग को पूरा करने का वादा करने वाली कांग्रेस पार्टी ने अब तीसरे विधानसभा चुनाव से ऐन पहले अलग कमेटी के गठन का निर्णय लेकर सिख वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए बड़ा चुनावी पासा फेंका है। वहीं अकाली एवं दूसरे नेता इसे चुनावी स्टंट बता रहे हैं। गौरतलब है कि हरियाणा में करीब 36 लाख से ज्यादा सिख हैं।

कांग्रेस को उबारने की कोशिश

कांग्रेस पार्टी तत्कालीन अध्यक्ष भजनलाल के नेतृत्व में जब वर्ष 2005 के विधानसभा चुनाव में उतरी तो प्रदेश के गुरुद्वारों के रखरखाव के लिए अलग कमेटी पहली बार चुनावी मुद्दा बना। मुख्यमंत्री ने मौजूदा वित्तमंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा के नेतृत्व में अलग कमेटी के गठन पर राय देने के लिए 2005 में समिति का गठन कर दिया। इसके बाद लोकसभा व विधानसभा चुनाव होने थे, सिख अपनी मांग पूरी न होता देख सरकार का विरोध करने लगे। इस दौरान प्रदेश के सिखों से लिए शपथपत्र, बातचीत के आधार पर चट्ठा कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी।

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने दस में से नौ सीटें जीतीं तो विधानसभा चुनाव जीत कर कांग्रेस लगातार दूसरी बार सत्तासीन हुई। इसके बाद भी अलग कमेटी की मांग कर रहे एडहॉक कमेटी के अध्यक्ष झींडा की अगुआई में आंदोलन करते रहे। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति खासी खराब रही और अब कुछ माह बाद विधानसभा चुनाव होने हैं।

कांग्रेस द्वारा हरियाणा में वर्ष 2005 व 2010 के चुनाव में घोषणा पत्र में शामिल वादे को वर्ष 2014 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व पूरा करते हुए लगातार तीसरे चुनाव में सिख वोट बैंक हासिल करने के लिए बड़ा पासा फेंका है।

हरियाणा एवं पंजाब कांग्रेस के नेता दिखे मंच पर

कांग्रेस ने अलग कमेटी का गठन कर सिखों की हितैषी साबित करने का पूरा प्रयास किया। यही कारण था कि अलग कमेटी की घोषणा के समय मंच पर हरियाणा सरकार के मुख्यमंत्री, तीन केबिनेट मंत्री रणदीप सुरजेवाला, परमवीर सिंह, हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा के अलावा दो मुख्य संसदीय सचिव सुल्तान सिंह जड़ौला, प्रह्लाद सिंह गिल्लाखेड़ा, हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर, पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा की मंच पर मौजूदगी यह दिखाती है कि चुनाव से पूर्व कांग्रेस इस मुद्दे का सारा श्रेय लेने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।
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भाजपा और इनेलो नहीं थे समर्थन में

प्रदेश का सिख अलग कमेटी का गठन होने से उत्साहित भी है, जिससे कांग्रेस को समर्थन मिल सकता है। वहीं दूसरी पार्टियों के नेता इसे महज चुनावी स्टंट बता रहे हैं।

यह तय है कि एक बार फिर अलग कमेटी का गठन विधानसभा चुनाव में चुनावी मुद्दा बनेगा, क्योंकि जहां कांग्रेस इस कदम पर सिख वोट मांगेगी। वहीं अकाली दल, भाजपा व इनेलो इसके पक्ष में नहीं हैं, ऐसे में उनके लिए मुश्किल हो सकती है।
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