एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की जीत का अंतर बढ़ाने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। वीरवार को कोविंद ने यहां पहुंचकर हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के भाजपा व सहयोगी दलों के सांसदों-विधायकों का समर्थन जुटाया।
उनका दौरा इसलिए भी खास रहा, चूंकि एनडीए से बाहर चल रहे इनेलो ने भी समर्थन की घोषणा कर दी। बारिश के कारण करीब एक घंटा देरी से वह एयरपोर्ट पर उतरे। वहां से यूटी गेस्ट हाउस पहुंचे और पंजाब के भाजपा-शिरोमणि अकाली दल के विधायकों, सांसदों से मुलाकात की। यहां से वे पंचकूला के होटल रेडबिशप पहुंचे। जहां पारंपरिक वाद्य यंत्रों और तिलक लगाकर उनका स्वागत किया गया।
उनके साथ मुख्यमंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल, डिप्टी सीएम सुखबीर बादल, केंद्रीय राज्य मंत्री और पंजाब भाजपा अध्यक्ष विजय सांपला, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अनिल जैन, सांसद प्रहलाद जोशी और ओम विरला ने भी दस्तक दी, जबकि पार्टी के सांसद, मंत्री व विधायक पहले ही पहुंच चुके थे। चार निर्दलीय विधायकों ने भी कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज कराई। केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज व अनिल जैन के साथ सीएम मनोहर लाल ने कोविंद का प्रोफाइल सबके समक्ष रखा और समर्थन की अपील की। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत ही शामिल हुए।
मतों का गणित देखिए
Ram Nath Kovind
मतों का गणित
हरियाणा में भाजपा के 47 विधायक हैं, जबकि चार निर्दलीय विधायकों का समर्थन है। इनेलो के भी 19 और एक अकाली दल विधायक का समर्थन हासिल हो गया है। भाजपा के सात लोकसभा, जबकि एक राज्यसभा सांसद हैं। इसी तरह इनेलो के तीन लोस सांसद हैं। राष्ट्रपति चुनाव के लिए सांसद के एक वोट की वैल्यू 708 और विधायक के एक वोट की वैल्यू 112 है।
राष्ट्रहित व लोक कल्याण मेरे लिए सर्वोपरि : कोविंद
रामनाथ कोविंद ने कहा कि राष्ट्रहित व लोक कल्याण मेरे लिए सर्वोपरि है। राष्ट्रपति का पद बड़ा गरिमापूर्ण है। अब तक सभी ने इस पर रहते हुए अपना दायित्व निभाया है। उनकी सोच सर्वांगीण विकास, रोजगार एवं आधुनिक शिक्षा के विस्तार जैसे मुद्दों के साथ देश को तरक्की के रास्ते पर ले जाने की है। राष्ट्रपति के पास देश की तीनों सेनाओं के कमांडर पद की भी जिम्मेदारी होती है, इसलिए देश की सीमाओं की सुरक्षा का भी बड़ा दायित्व है। उम्मीदवार घोषित किए जाने से पूर्व इसकी भनक तक उन्हें नहीं थी। कुछ समय बाद हम आजादी की 75वीं वर्षगांठ में होंगे, यह देश के इतिहास का बड़ा आयोजन होगा।
ऐसे में हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि आज तरक्की के मामले में जहां खड़े हैं, उससे कई गुना आगे खड़े हों। उन्होंने हरियाणा-पंजाब से जुड़ी स्मृतियों को ताजा करते हुए कहा कि यहां पहली बार आना नहीं हुआ। महाराजा अग्रसेन जैसी शख्सियत और एक ईंट और एक रुपया की परंपरा यहां की मिसाल और प्रेरणा है। मेहनतकशों की जमीन पंजाब और हरियाणा को नमन करते हैं।