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एक हो सकते हैं इनेलो, भाजपा और अकाली दल!

Wed, 27 Aug 2014 02:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अनिल भारद्वाज/प्रवीण पाण्डेय
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हरियाणा में इनेलो व भाजपा के बीच समझौते की संभावनाएं समाप्त नहीं हुई हैं। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) दोनों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव में शिअद-इनेलो गठबंधन चुनावी मैदान में अपने उम्मीदवार उतारने जा रहे हैं, लेकिन शिअद अध्यक्ष व पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल की ओर से मंगलवार को दिया गया संकेत कुछ और ही इशारा करते हैं।
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इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि चुनाव पूर्व या बाद में तीनों दल एक हो जाएं। उल्लेखनीय है कि पंजाब में शिअद की भाजपा के साथ समझौते की उम्र उतनी ही लंबी है, जितनी हरियाणा में इनेलो के साथ। मंगलवार को शिअद के अध्यक्ष व पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने यह कहकर हरियाणा के राजनीतिक समीकरणों के संबंध में नई चर्चा छेड़ दी कि जरूरत पड़ने पर वे भाजपा व इनेलो के बीच मध्यस्थ की भूमिका अदा कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी दोनों ही दलों से मित्रता है, जो दशकों से जारी है। हरियाणा में उनके इनेलो के साथ समझौते पर भाजपा को कोई ऐतराज नहीं है, क्योंकि यह पूर्व उप प्रधानमंत्री चौ. देवीलाल के समय से चला आ रहा है। बाकी जहां तक हरियाणा में भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने की बात है, जो आने वाले समय में न जाने क्या समीकरण बन जाएं?
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भाजपा-इनेलो दोस्ती सकारात्मक भूमिका निभाएगी

सीएम बादल ने स्पष्ट कहा कि शिअद की भाजपा और इनेलो से दोस्ती आने वाले समय में काफी सकारात्मक भूमिका निभाएगी। यह हरियाणा में शिअद सहित इन दोनों दलों को साथ लाने में अहम भूमिका अदा कर सकती है।

यह भूमिका चुनाव पूर्व होगी या बाद में, इस बात को सुखबीर टाल गए। केवल इतना कहा कि वक्त का इंतजार कीजिए। साथ ही यह भी कहा कि वह इनेलो के साथ गठबंधन में अंबाला शहर और कालियांवाली सीट पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे।

उन्होंने कहा कि उनका यह प्रयोग पहले भी कामयाब रहा है और वह न केवल विधानसभा, बल्कि लोकसभा चुनाव में भी जीत हासिल करने में कामयाब रहे।

गठबंधन पर चला सुखबीर ने सियासी पैंतरा

हजकां-भाजपा गठबंधन पर चल रहे मंथन के बीच पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल का बयान एक बार फिर से हजकां के लिए दिक्कत खड़ी कर सकता है।

सुखबीर के मुताबिक इनेलो से उनका पुराना नाता है और हरियाणा में इनेलो की मदद के लिए वे आगे आएंगे। जरूरत पड़ने पर वे मध्यस्थता भी कर सकते हैं। लोकसभा चुनाव में इस मामले को लेकर हजकां ने खुला विरोध किया था।

लोकसभा चुनाव में हजकां और भाजपा दोनो दलों ने गठबंधन के तौर पर प्रत्याशियों को उतारा था, लेकिन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर बादल दोनों ही इनेलो के पक्ष में प्रचार करने के लिए पहुंचे। बादल ने सिरसा में सभाएं की तो सुखबीर ने सिख बाहुल्य क्षेत्रों में इनेलो के लिए वोट मांगे।

बिश्नोई ने पत्र लिखकर जताई आपत्ति

इस बात से खफा कुलदीप बिश्नोई ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को पत्र लिख कर आपत्ति जताई, लेकिन उनकी आपत्ति का कोई असर नहीं हुआ।

हिसार से लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी कुलदीप ने इस मुददे को उठाया, लेकिन भाजपा के कान पर जूं नहीं रेंगी। अब हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत गर्म है। गठबंधन को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं ऐसे में सुखबीर बादल के बयान से अलग सियासत शुरू होने के आसार हैं।

हालांकि चंडीगढ़ में आयोजित पत्रकार वार्ता में हरियाणा भाजपा के बड़े नेता कैप्टन अभिमन्यु यह साफ कर चुके हैं कि इनेलो और बादल परिवार की दोस्ती पर भाजपा को कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन हजकां भाजपा गठबंधन बने रहने की सूरत में विधानसभा चुनाव में फिर से इस मुद्दे को लेकर सियासत गरमाएगी।
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बडे़ बादल पहले भी कर चुके हैं प्रयास

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल लोकसभा चुनाव से पहले से इनेलो भाजपा की दोस्ती करवाने को लेकर सक्रिय रहे हैं। इनेलो की कुरुक्षेत्र रैली में मंच पर अभय चौटाला ने बड़े बादल को परिवार का मुखिया बता कर सारी जिम्मेदारी उन पर छोड़ी थी, लेकिन लोकसभा चुनाव में यह गठबंधन नहीं हो सका। अब प्रदेश की जनता की नजरें हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद बनने वाले समीकरणों पर टिकी हैं।

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