रिहायशी इलाके में चल रही इंडस्ट्रियल एक्टिविटी से लोगों का जीना दूभर है। अधिकारी चाह कर भी इन पर अंकुश लगाने में विफल हैं।
हालांकि लोगों की शिकायतें निचले स्तर के अधिकारियों से लेकर सीएम सेल तक पहुंच चुकी हैं। बावजूद इसके रिहायशी इलाकों में उद्योग चलाने वाले बेखौफ हैं।
बता दें कि हरियाणा सरकार ने हरियाणा के अन्य जिलों की तरह कुरुक्षेत्र में भी बकायदा इंडस्ट्रियल क्षेत्र स्थापित किया हुआ है। लेकिन सरकार के नियमों और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ठेंगा दिखाया जा रहा है।
ताजा मामला थानेसर के गुदड़ी मोहल्ला वासियों ने उठाया है। इनका कहना है कि मुहल्ले में स्थित एक मकान में पिछले छह महीनों से इंडस्ट्रियल एक्टिविटी हो रही है। इसका असर यहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई और शांति पर पड़ रहा है।
नहीं माने तो सख्त एक्शन लिया जाएगा
दुकानों पर बिकने वाली लोहे की अलमारियां व अन्य वस्तुओं को तैयार करने वाली गुदड़ी मोहल्ला स्थित अवैध फैक्टरी पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पंचकूला की टीम ने छापामारी की।
और 10 दिन के भीतर इस काम बंद करने की चेतावनी दी गई है। अगर 10 दिन के भीतर ये फैक्टरी बंद नहीं हुई तो बोर्ड की ओर से सख्त एक्शन लिया जाएगा।
बता दें कि सीएम सेल, डीसी व एचएसपीसीबी के मुख्य वैज्ञानिक सहित पांच जगह से जारी निर्देशों के बाद हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पंचकूला हेडक्वार्टर की टीम ने मकान में छापामारी की। छापामारी के समय मकान मालिक घर पर मौजूद नहीं था।
एसडीओ ने लगाई कड़ी फटकार
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ विपिन कुमार ने मकान मालिक राजेंद्र चौधरी की गैरमौजूदगी में उनके परिजनों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि रिहायशी क्षेत्र में इस प्रकार का कार्य यहां के लोगों के स्वास्थ्य के लिए बहुत घातक सिद्ध हो सकता है।
उन्होंने बताया कि स्प्रे पेंटिंग से निकलने वाले वेपर सांस के जरिये व्यक्ति के फेफड़ों में जमा होकर गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।
रिपोर्ट तैयार, जल्द होगी कार्रवाई: एसडीओ
शिकायत मिलने के बाद गुदड़ी मोहल्ला स्थित मकान में चल रहे कामर्शियल वर्क की जांच करने पहुंची हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड पंचकूला टीम के सदस्य एसडीओ विपिन कुमार ने बताया कि मौके का मुआयना करके इंस्पेक्शन रिपोर्ट तैयार कर दी गई है। जल्द ही सामान को सील कर दिया जाएगा।
सांस व चरम के रोगों का है कारण: डॉ. विवेक
सिविल अस्पताल के डॉ. विवेक अग्रवाल ने बताया कि स्प्रे से पेंट करते समय छोटे-छोटे पार्टिकल हवा में मिल जाते हैं। जो काफी देर तक वातावरण में ही रहते हैं।
इस कारण सांस और चरम के रोग होने की आशंका अधिक रहती है। इसके अलावा स्प्रे करने वालों को भी चरम रोग लगने का भय बना रहता है। उन्होंने कहा कि अस्थमा के मरीजों को इससे अधिक दिक्कत होती है।