कैथल। जिले भर में 770 आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया न मिलने के कारण वर्कर्स को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चालू वित्त वर्ष में जिले भर से करीब 54.62 लाख रुपये किराये का भुगतान भवन मालिकों को नहीं दिया गया है। इस कारण वर्कर्स को आंगनबाड़ी केंद्रों को खाली करने के लिए दबाव सहना पड़ रहा है। विभाग द्वारा किराया देना तो दूर, किराये के भवनों में ही रसोई, स्टोर की व्यवस्था करने संबंधी निर्देश दिए जा रहे हैं।
बीस हजार से ज्यादा बच्चों पर असर
गौरतलब है कि जिलेभर के आंगनबाड़ी केंद्रोें में हजारों की संख्या में बच्चे आते हैं। औसतन एक केंद्र में बीस से तीस बच्चे पढ़ने आते हैं। इस हिसाब से जिले भर के केंद्रों में बीस हजार से ज्यादा बच्चे आते हैं। यदि इन केंद्रों का किराया नहीं दिया गया तो ये बच्चे सड़कों पर बैठने को मजबूर हो जाएंगे।
जिले भर में 1264 आंगनबाड़ी केंद्र
कैथल में कुल 1264 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 770 आंगनबाड़ी केंद्र किराये पर चल रहे हैं। शहरों में 1500 रुपये तक तो गांवों में 750 रुपये हिसाब से किराया दिया जाता है। चालू वित्त वर्ष में अभी तक एक भी माह का किराया नहीं मिल पाया है। जिस कारण इसकी राशि लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में किराये पर चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों पर वर्कर्स की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं।
सबसे ज्यादा कैथल शहरी ब्लॉक में परेशानी
सबसे ज्यादा किराया राशि कैथल अर्बन में एकत्रित हो गई है। यहा 101 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 14 लाख 37 हजार रुपये किराये का भुगतान नहीं हो पा रहा है। इसी प्रकार से पूंडरी में 286 केंद्रों के लिए 11 लाख 70 हजार, कैथल ग्रामीण में 86 केंद्रों के लिए सात लाख 74 हजार, कलायत में 168 भवनों के लिए आठ लाख 50 हजार, राजौंद में 79 केंद्रों के लिए सात लाख 11 हजार, सीवन में 38 केंद्रों के लिए तीन लाख 60 हजार रुपये की राशि लंबित है। विभाग द्वारा इसके लिए बजट बनाकर भेजा गया है। लेकिन भुगतान नहीं हो पा रहा है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मीटिंगों में इस मुद्दे पर चर्चा अवश्य होती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अभी तक कुछ नहीं हो पाया है।
किराया न देने पर खाली करवाए भवन
आंगनबाड़ी वर्कर्स एसोसिएशन की जिला सचिव शकुंतला का कहना है कि कैथल शहर में दो आंगनबाड़ी केंद्र तो किराया न मिलने के कारण खाली करवा लिए गए हैं। किराया न मिलने के कारण वर्कर्स को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हर रोज भवन मालिक किराये की मांग करते हैं। ऐसे में उनके लिए अपना काम करना भी मुश्किल होता जा रहा है। उन्हें डर है कि केंद्रों के मालिक कभी भी सामान उठाकर बाहर फेंक सकते हैं और वे सड़क पर आ सकते हैं। विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए। इसी प्रकार से जिला प्रधान संतरो का कहना है कि इस बारे में विभागीय अधिकारियों से कई बार मांग की जा चुकी है। लेकिन लंबे समय से किराये का भुगतान न होने के कारण वर्कर्स को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
‘एस्टिमेट भेजा है, मंजूरी मिलते भुगतान’
कार्यक्रम कार्यालय के अधिकारी का कहना है कि विभाग को बजट बनाकर भेज दिया गया है। जैसे ही मंजूरी मिलती है, किराया केंद्र संचालकों को दे दिया जाएगा।