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कनाडा में दो लाख विद्यार्थियों के सिर पर लटकी फीस की तलवार, पीएम मोदी को करनी चाहिए बात

Wed, 24 Jun 2020 11:04 AM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, जालंधर

सार

  • इसी साल दो सेमेस्टर की फीस करवानी होगी जमा
  • विद्यार्थी ओवरटाइम करके करते थे फीस का जुगाड़
  • कनाडा सरकार की तरफ से कोई राहत नहीं दी गई
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India and Canada PM
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विस्तार
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लॉकडाउन ने उन विद्यार्थियों की कमर तोड़ दी है, जो स्टडी वीजा पर कनाडा गए हैं। करीब दो लाख विद्यार्थियों पर फीस की तलवार लटकी हुई है। कनाडा सरकार ने लॉकडाउन के दौरान बेशक विद्यार्थियों को 2 हजार डॉलर प्रति माह दिया, लेकिन अगले माह सभी स्टूडेंट्स को फीस जमा करवानी ही होगी। कॉलेजों की फीस 10 हजार डॉलर और यूनिवर्सिटी की फीस 20 हजार डॉलर के करीब है। अब स्टूडेंट्स की चिंता बढ़ने लगी है।
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कारण यह है कि अधिकतर विद्यार्थी अपने सेमेस्टर की फीस स्टडी के साथ-साथ पार्ट टाइम जॉब और ओवर टाइम लगाकर निकाल लेते थे। जनवरी 2021 में शुरू होने वाले सेमेस्टर की फीस भी इसी साल नवंबर में जमा करवानी होगी, इसको लेकर कॉलेजों व यूनिवर्सिटी ने अपनी गाइड लाइन तैयार करनी शुरू कर दी है।
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कॉलेजों और यूनिवर्सिटी की तरफ से विद्यार्थियों को हिदायत दी गई है कि वह सितंबर में शुरू होने वाले सेमेस्टर को घर से ऑनलाइन कर सकते हैं, लेकिन फीस पूरी ही अदा करनी होगी। अगले माह फीस जमा होने का क्रम शुरू हो जाएगा।

20 घंटे प्रति सप्ताह काम करने की परमिशन

दरअसल, कनाडा में स्टडी वीजा पर जाने वाले विद्यार्थी को 20 घंटे प्रति सप्ताह काम करने की परमिशन मिलती है। उनको 11 डॉलर प्रति घंटा पगार मिलती है और अगर वह अवैध रूप से ओवर टाइम लगाते हैं तो 5-6 डॉलर प्रति घंटा बन जाता है। ज्यादा विद्यार्थी कनाडा के कॉलेजों में ऑफिस मैनेजमेंट, जनरल बिजनेस, इंटरनेशनल बिजनेस मैनेजमेंट, सोशल सर्विस, चाइल्ड केयर, पर्सनल स्पोर्ट व इंजीनियरिंग और डिप्लोमा में दाखिला लेते हैं।

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कॉलेज के हर सेमेस्टर की फीस पांच से 10 लाख रुपये (भारतीय मुद्रा) है, जबकि एक सेमेस्टर में रहने और खाने का खर्च 1.5 लाख के आसपास अलग से आता है। लॉकडाउन के कारण तमाम रेस्तरां, होटल, कार्यालय बंद हैं और स्टूडेंट्स को जॉब से निकाल दिया गया है। सिर्फ बड़े स्टोर पर ही स्टूडेंट्स काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी तादाद भी कम कर दी गई है।
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प्रधानमंत्री मोदी को कनाडा पीएम से बात करनी चाहिए...

त्रिवेदी ओवरसीज के एमडी सुकांत का कहना है कि विद्यार्थियों पर गहरा संकट है और जल्द ही भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी को भी इस बारे में कनाडा पीएम जस्टिन ट्रूडो से बात करके फीस की राहत दिलानी चाहिए। जुलाई और नवंबर में दो सेमेस्टर की फीस स्टूडेंट्स को जमा करवानी होगी। काम धंधा है नहीं, पैसे कहां से जमा करवाएंगे।

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हमारे लिए परेशानी तो है, बेटे को पैसे भेजने ही पड़ेंगे
जालंधर से कैलगरी में स्टडी के लिए गए सिद्धार्थ भोला के पिता रोहित भोला का कहना है कि बेटे को कनाडा भेजने में उन्होंने काफी पैसा लगाया था। अब वहां और काम धंधा रहा नहीं तो बेटा फीस कहां से लाएगा। जो पैसा ट्रूडो सरकार ने दिया है, वह कमरे के किराये और खाने पीने में खर्च हो रहा है। अगले सेमेस्टर की फीस सिर पर है और वह भेजने का इंतजाम करना ही पड़ेगा।
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