दरअसल, कनाडा में स्टडी वीजा पर जाने वाले विद्यार्थी को 20 घंटे प्रति सप्ताह काम करने की परमिशन मिलती है। उनको 11 डॉलर प्रति घंटा पगार मिलती है और अगर वह अवैध रूप से ओवर टाइम लगाते हैं तो 5-6 डॉलर प्रति घंटा बन जाता है। ज्यादा विद्यार्थी कनाडा के कॉलेजों में ऑफिस मैनेजमेंट, जनरल बिजनेस, इंटरनेशनल बिजनेस मैनेजमेंट, सोशल सर्विस, चाइल्ड केयर, पर्सनल स्पोर्ट व इंजीनियरिंग और डिप्लोमा में दाखिला लेते हैं।
एसेसमेंट के लिए सरकारी कर्मचारियों ने चक्कर कटवाए तो युवक ने ऐसे लिया बदला, देखिए तस्वीरें
कॉलेज के हर सेमेस्टर की फीस पांच से 10 लाख रुपये (भारतीय मुद्रा) है, जबकि एक सेमेस्टर में रहने और खाने का खर्च 1.5 लाख के आसपास अलग से आता है। लॉकडाउन के कारण तमाम रेस्तरां, होटल, कार्यालय बंद हैं और स्टूडेंट्स को जॉब से निकाल दिया गया है। सिर्फ बड़े स्टोर पर ही स्टूडेंट्स काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी तादाद भी कम कर दी गई है।
त्रिवेदी ओवरसीज के एमडी सुकांत का कहना है कि विद्यार्थियों पर गहरा संकट है और जल्द ही भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी को भी इस बारे में कनाडा पीएम जस्टिन ट्रूडो से बात करके फीस की राहत दिलानी चाहिए। जुलाई और नवंबर में दो सेमेस्टर की फीस स्टूडेंट्स को जमा करवानी होगी। काम धंधा है नहीं, पैसे कहां से जमा करवाएंगे।
पहले लॉकडाउन और अब गर्मी ने स्किन के मरीजों का बढ़ाया दर्द, बचाव के लिए अपनाएं ये तरीके
हमारे लिए परेशानी तो है, बेटे को पैसे भेजने ही पड़ेंगे
जालंधर से कैलगरी में स्टडी के लिए गए सिद्धार्थ भोला के पिता रोहित भोला का कहना है कि बेटे को कनाडा भेजने में उन्होंने काफी पैसा लगाया था। अब वहां और काम धंधा रहा नहीं तो बेटा फीस कहां से लाएगा। जो पैसा ट्रूडो सरकार ने दिया है, वह कमरे के किराये और खाने पीने में खर्च हो रहा है। अगले सेमेस्टर की फीस सिर पर है और वह भेजने का इंतजाम करना ही पड़ेगा।