महामारी के इस दौर में संक्रमण का फैलाव कर्मचारियों और अफसरों से दूर रहे इसे लेकर रेल प्रशासन गंभीर है। इसी के मद्देनजर रेलवे कार्यालयों में अब पूरी तरह से ' ई-ऑफिस ' कल्चर डेवलप करने की तैयारी कर ली गई है। हालांकि इस दिशा में रेलवे कुछ समय से काम भी कर रहा है। लेकिन अब 1 जुलाई तक इस कल्चर को पूरी तरह से अपनाने का टारगेट दे दिया गया है। तमाम मंडल रेल प्रबंधक कार्यालयों में निर्देश दिए गए हैं कि अपने अधीनस्थ सभी रेल कार्यालयों में ज्यादा से ज्यादा काम डिजिटल ढंग से करें। जिससे कामकाज के दौरान मैन-टू-मैन कांटेक्ट की संभावना कम से कम रहे।
फाइल मूवमेंट, पत्र व्यवहार ऑनलाइन होगा
ई-ऑफिस कल्चर के तहत रेलवे कार्यालयों में अब रूटीन में होने वाला अधिकतर पत्र व्यवहार और फाइल वर्क ऑनलाइन होंगे। बहुत जरूरी दस्तावेज ही मैनुअली इधर से उधर भेजा जाएगा। जबकि अधिकतर फिजिकल फ़ाइल मूवमेंट्स बंद कर दी जाएगी। एनआईसी इसके लिए रेलवे को सहयोग कर रहा है इसके तहत बिलिंग पेमेंट्स इत्यादि काम भी ऑफिस के माध्यम से ही होंगे। वहीं कर्मचारियों की ट्रेनिंग अफसरों की मीटिंग इत्यादि भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ही चलेंगी। अभी रेल कार्यालयों में कुछ काम ऑनलाइन तो कुछ काम ऑफलाइन भी चल रहा है। मगर, रेल प्रशासन चाहता है कि 1 जुलाई से तक होने वाला तमाम ऑफलाइन काम पूरी तरह से ई-ऑफिस कल्चर में तब्दील होकर ऑनलाइन हो जाए।
सैलरी, पेमेंट संबंधी सॉफ्टवेयर औऱ डेवलप होंगे
रेलवे अपना सैलरी और पेमेंट संबंधी सॉफ्टवेयर सिस्टम भी और डिवेलप करेगा। रेल कर्मचारियों की एक सैलरी आईडी पहले ही बनाई जा चुकी है। जिसके अंतर्गत वेतन, पीएफ, एचआरए व अन्य बिल क्लीयरेंस एवं पेमेंट इत्यादि तमाम ट्रांजेक्शन ऑनलाइन ही होगी। अभी तक सभी डिविजनल हेड क्वार्टर में मौजूद बैंक की ट्रेजरी ब्रांच में वेतन एवं बिल पेमेंट संबंधी चेक जमा करवाया जाता था। उसके बाद आरटीजीएस और एनईएफटी के माध्यम से रेल कर्मियों, ठेकेदारों, सप्लायर व अन्य थर्ड पार्टी को तमाम पेमेंट होती थी। लेकिन अब ऐसे सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऑनलाइन काम होगा। जिससे बैंक की ट्रेजरी ब्रांच में जाकर मैनुअली चेक जमा करवाने की भी कोई जरूरत नहीं होगी। सारा काम सेंट्रलाइज्ड इंटीग्रेटेड पेमेंट सॉल्यूशन के जरिए ऑनलाइन आगे बढ़ेगा।