डॉक्टर साहब मैं कोरोना पॉजिटिव हूं, मुझे दाखिल कर लो। मैं गुरुग्राम से आया हूं और वहां डॉक्टरों ने मुझे दाखिल करने से मना कर दिया। इसलिए आप मुझे एडमिट कर लो। ये शब्द करनाल के गांव भैणीखुर्द निवासी 29 वर्षीय युवक हैं, जो गुरुग्राम में एक कंपनी में नौकरी करता है। यह घटनाक्रम है रात 1.30 बजे का। आनन फानन में डॉक्टरों की टीम ने युवक को संभाला और कॉलेज प्रबंधन समेत जिला प्रशासन तक के फोन घनघनाए। पूरी कार्रवाई के बाद रात को ही उसे दाखिल कर लिया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, करनाल के गांव भैणी खुर्द निवासी युवक गुरुग्राम में एक कंपनी में काम करता है। शनिवार को उसे खांसी और बुखार होने पर वह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचा और वहां पर अपना कोरोना टेस्ट कराया। टेस्ट में उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। जब युवक ने उसे दाखिल करने के लिए कहा तो अस्पताल की तरफ से उसे घर पर रहने की सलाह दी गई, लेकिन युवक नहीं माना तो प्रबंधन ने उसे गुरुग्राम के सिविल अस्पताल में भेज दिया। जैसे ही सिविल अस्पताल को रिपोर्ट दिखाई तो वहां भी उसे होम क्वारंटीन रहने के निर्देश दे दिए गए और दाखिल नहीं किया।
तब युवक रात को ही अपनी गाड़ी लेकर करनाल की तरफ चल रहा। रात करीब 1.30 बजे अचानक से कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाहर एक गाड़ी रूकती है और एक युवक डॉक्टर के पास पहुंचता है। युवक अपनी रिपोर्ट दिखाते हुए कहता है कि वह कोरोना पॉजिटिव है। इतना सुनते ही डॉक्टरों और स्टाफ सदस्यों में हड़कंप मच गया। युवक को अलग से कमरे में ले जाया गया और कॉलेज निदेशक डॉ. जेसी दुरेजा, कोविड-19 के नोडल ऑफिसर डॉ. अभिनव डागर समेत सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार से बात की गई। बाद में डीसी ऑफिस में भी फोन करके पूछा गया। फिर रात को ही युवक को दाखिल कर लिया गया। हालांकि, सुबह युवक की फाइल तैयार करके उसे मुलाना मेडिकल कॉलेज में भेज दिया गया।