ट्रेन हादसे न हों, इसके लिए हाथियों को ट्रैकों से दूर रखने के लिए इंडियन रेलवे ने बेहद अनोखा तरीका खोज निकाला है, जिसका कनेक्शन मधुमक्खियों से है। रेलवे मधुमक्खियों की कृत्रिम गूंज का सहारा ले रहा है। अब उत्तर रेलवे अपने क्षेत्र के ऐसे प्रभावित क्षेत्रों में लाउड स्पीकर लगवा रहा है, जिससे मधुमक्खियों के झुंड की कृत्रिम आवाज गूंजेगी। ट्रेन आने से पांच मिनट पहले ये लाउडस्पीकर ऑन कर दिए जाएंगे और पांच मिनट तक मधुमक्खियों की आवाज गूंजती रहेगी। रेलवे का दावा है कि इस गूंज से हाथी रेल लाइनों के पास आएंगे ही नहीं और इससे रेल हादसों में कमी आएगी।
दरअसल, रेलवे और वन विभाग के अनुसंधान के बाद इस फार्मूले को तैयार किया गया था। उत्तर रेलवे अब हाथियों से होने वाले रेल हादसों को रोकने के लिए इस फार्मूले पर काम कर रहा है। इस अनुसंधान में ये तथ्य सामने आया है कि जंगलों में मधुमक्खियों का झुंड हाथियों का बहुत परेशान करता है। इसलिए हाथियों को जैसे ही मधुमक्खियों के झुंड की आवाज सुनाई देती है, वे परेशान होकर वहां से रास्ता ही बदल जाते हैं। इसलिए उत्तर रेलवे ने वहां के हाथी प्रभावित इलाकों में स्थित स्टेशनों पर ऐसे लाउड स्पीकर लगाने शुरू कर दिए हैं।
उधर, इन इलाकों में ट्रेन की स्पीड 30 से 35 किलोमीटर प्रति घंटा रखने के भी निर्देश दिए हैं। उत्तर भारत में उत्तराखंड में टांडा रेंज जंगल से लालकुआं, देहरादून, हल्द्वानी, नैनीताल समेत बरेली-दिल्ली, वेस्टर्न यूपी इत्यादि इलाकों में रेल लाइनें हाथियों से ज्यादा प्रभावित हैं। इसलिए अभी इस बेल्ट में लाउडस्पीकर लगाने का काम शुरू किया गया है। इसके अलावा देश में वेस्ट बंगाल, असम में लुमडिंग आरक्षित जंगल, जलपाईगुड़ी के बिनागुड़ी इलाके में, आंधप्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा, छत्तीसगढ़ इलाकों में भी रेल लाइनों पर हाथियों से हादसों का खतरा बना रहता है।