राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमला पूरी तरह से कायरतापूर्ण है, वीर बहादुर शहीद जवानों के मेरा शत-शतन नमन। उन शहीदों के परिवारों के साथ पूरा देश शोक में डूबा हुआ है। अपने देशवासियों के साथ इस जघन्य अपराध की निंदा करता हूं और शहीद होने वाले बहादुर जवानों को देश की ओर से श्रद्धांजलि देता हूं।
वे रविवार को गन्नौर की अंतरराष्ट्रीय बागवानी मंडी में एग्री लीडरशिप समिट के समापन समारोह में संबोधन कर रहे थे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में कहा कि हम सभी ने साहस और धैर्य के साथ ऐसी चुनौतियों का सामना किया है और हादसों व चुनौतियों का सामना करते हुए पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ते रहेंगे।
देश की ओर से अपने बहादुर जवानों और सुरक्षा कर्मियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं और उनको नमन करता हूं। हमारे बहादुर जवान ही देश की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, जिससे हर कोई सुरक्षित माहौल में रहता है। हर कोई उन जवानों के परिवारों के साथ खड़ा हुआ है। जिस तरह कायरतापूर्ण तरीके से जघन्य अपराध किया गया है, वह पूरी तरह निंदनीय है।
सुरक्षा कर रहा जवान, अनाज दे रहा किसान
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि देश की सुरक्षा जवान कर रहा है, तो देश को पर्याप्त अनाज किसान दे रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश को कृषि नेतृत्व प्रदान करने की क्षमता रखता है। जय जवान, जय किसान के नारे को सही मायने में यही चरितार्थ कर रहा है।
हरियाणा में लगभग हर परिवार में एक बेटा किसान है तो दूसरा सेना में जवान है। गन्नौर की अंतरराष्ट्रीय बागवानी मंडी में रविवार को एग्री लीडरशिप समिट के समापन समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि हरियाणा ने इस्राइल, ब्राजील, नीरदलैंड समेत कई देशों के साथ उत्कृष्टता केंद्र खोले हैं, जिससे खेती और पशुपालन में बेहतर करने के लिए नई तकनीकों से मदद मिल रही है।
राष्ट्रपति ने स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण व बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ में बेहतर कार्य करने पर प्रदेश सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि हरियाणा कृषि के साथ विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में भी अग्रणी है।
दुग्ध उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है
हरियाणा देश की समृद्धि का आधार है और किसानों के परिश्रम से लगातार तरक्की पर है। यह प्रति व्यक्ति दुग्ध उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है। कहावत भी है कि देशों में देश हरियाणा, जित दूध दही का खाना। इस वर्ष पराली के उचित प्रबंधन को अपनाकर उसका बेहतर उपयोग किया।
भविष्य में पराली से होने वाले प्रदूषण को समाप्त कर देंगे। सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए देश में 100 लंबित परियोजनाओं को पूरा किया जा रहा है। रेलवे के सहयोग से अनाज के वैज्ञानिक तरीके से भंडारण के लिए साईलोज का निर्माण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में आधुनिक कृषि पद्धति अपनाने की आवश्यकता है। परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीक व पद्धतियों का समन्वयन करने से किसान लाभान्वित होंगे। आधुनिक कृषि व्यवस्था के लिए नई पीढ़ी को तैयार करने के लिए इको सिस्टम उपलब्ध करवाया जा रहा है। एग्रीकल्चर वैल्यू चयन को ध्यान में रखकर एक उद्यमी की निगाह से खेती अपनाने की जरूरत है।