देवीलाल ने किसान के ट्रैक्टर को टैक्स मुक्त कर गड्डा घोषित करवाया था और अनुसूचित जाति के लोगों के लिए चौपालों का निर्माण जैसे कल्याणकारी कार्य करवाए। अभय सिंह चौटाला ने कहा कि वह पूरे प्रदेश में अपने कार्यक्रम रखेंगे और ऐसे हलकों में जाएंगे जहां विधायकों ने कहा था कि वे किसानों के समर्थन में इस्तीफा देने को तैयार हैं।
विधानसभा में अब एक भी इनेलो विधायक नहीं
विधानसभा में अब एक भी इनेलो विधायक नहीं रह गया है। 2019 विधानसभा चुनाव में अभय चौटाला ने इनेलो की तरफ से अकेले ही जीत दर्ज की थी। वह दो उपचुनाव जीतकर आज तक कुल चार बार विधायक बने हैं। उन्होंने इसी माह 11 और 14 जनवरी को भी ईमेल और किसी अन्य व्यक्ति के हाथों अपना सशर्त त्यागपत्र स्पीकर को भेजा था।
अब विधानसभा सचिव आरके नांदल द्वारा अधिकारिक बुलेटिन और सरकार के गजट में अधिसूचित किया जाएगा। इसकी सूचना भारतीय चुनाव आयोग को भी भेजी जाएगी ताकि उनके त्यागपत्र से रिक्त हुई ऐलनाबाद सीट पर उपचुनाव करवाने की कवायद शुरू की जा सके। उपचुनाव करवाने की समय सीमा त्यागपत्र स्वीकार होने से छह माह के भीतर होती है। कुछ विशेष परिस्थितियों में इसे और आगे टाला भी जा सकता है।
कब-कब विधायक बने अभय
अभय चौटाला सर्वप्रथम मई 2000 में सिरसा जिले के रोड़ी हलके से उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। उनके पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला फरवरी 2000 विधानसभा चुनाव में नरवाना और रोड़ी दोनों सीटों से चुनाव जीते थे। उन्होंने रोड़ी सीट से त्यागपत्र दे दिया, जिस पर अभय ने उपचुनाव लड़ा। इसके बाद जनवरी 2010 में अभय ने ऐलनाबाद से उपचुनाव जीता। ओम प्रकाश चौटाला अक्तूबर 2009 विधानसभा चुनाव में भी उचाना और ऐलनाबाद दोनों सीटों से चुनाव जीत गए थे। उन्होंने ऐलनाबाद सीट छोड़ थी। इसके बाद 2014 और 2019 विधानसभा चुनाव में अभय ने फिर ऐलनाबाद सीट जीती।