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इराक में बंधक भारतीयों की वापसी में अड़ंगा

Sun, 08 Feb 2015 11:56 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, अंबाला सिटी
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इराक की बसरा सपोर्ट सिटी की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में बंधक बने भारतीयों की वतन वापसी में अब एक और अड़ंगा अड़ गया है। जिस कंपनी में ये भारतीय बंधक फंसे हुए हैं, उस कंपनी ने इंडियन अंबेसी के साथ किए वायदे से मुकरते हुए सभी बंधकों को पूरा वेतन देने से साफ इंकार कर दिया है।
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कंपनी ने बंधकों को साफ कह दिया है कि कंपनी उन्हें उनके कुल बकाया वेतन का सिर्फ 30 फीसद ही देगी।  इसी बात को लेकर इराक में संबंधित कंपनी में काम कर रहे बंधकों में जबरदस्त रोष व्याप्त हो गया है।

पूरे वेतन के साथ वतन वापसी की महीनों से उम्मीद लगाए बैठे बंधक हताश हो गए हैं, जिसके चलते इन बंधकों ने इराक में ही मौजूद इंडियन अंबेसी के अफसरों से फिर से कंपनी की शिकायत कर दी है।
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इस पर अंबेसी के अफसरों ने इस बारे में फिर से कंपनी मालिक से बात करने को कहा है। अफसरों ने बंधकों को सब्र रखने की अपील की है। उधर, कंपनी की ओर से भी बंधकों पर 30 प्रतिशत वेतन लेने पर ही दबाव बनाया जा रहा है।

कंपनी ने अंबेसी अफसरों से यह किया था वायदा

बसरा की अब्दुला अल जमूरी कंस्ट्रक्शन कंपनी में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार व चेन्नई के करीबन 165 भारतीय बंधक बने हुए हैं। इन बंधकों की संख्या 181 थी, मगर विगत माह में यूपी के बंधकों को यहां से निकाला जा चुका है।

अब वहां फंसे इन भारतीयों को पिछले नौ माह से बंधक बनाकर बंधुआ मजदूरी करवाई जा रही है। जिस पर इन बंधकों ने पीएम नरेद्र मोदी व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को इराक से पत्र भेजकर वतन वापसी की मांग की थी। इस पर इंडियन अंबेसी के अफसरों ने इन बंधकों से संपर्क कर उन्हे वेतन समेत वतन वापसी का आश्वासन दिया था।

इसी के चलते अंबेसी के अफसर इस कंपनी में पहुंचे थे और बकायदा कंपनी मालिक व संचालकों के साथ बैठक करके ये तय किया था कि बंधकों को रिहा कर दिया जाएगा, साथ ही उन्हें पहले 3 माह का वेतन नगद दिया जाएगा, उसके बाद शेष बकाया का वेतन उनके खातों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। कंपनी ने ऐसा करने के लिए फरवरी के पहले हफ्ते तक का वक्त लिया था।

मगर अब कंपनी अपने वायदे से मुकर गई है। कंपनी ने बंधकों से साफ कह दिया है कि वे 30 फीसदी वेतन लेना चाहते हैं तो ले सकते हैं। इससे ज्यादा वेतन कंपनी उन्हें नहीं दे सकती है। जबकि बंधक बने भारतीयों का कंपनी के पास नौ से बारह माह तक  का वेतन बकाया है।
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उधारी चुकाने में ही खत्म हो जाएगा वेतन

इराक में बंधक महीनों से बिना पगार के कंपनी में रह रहे हैं। कंपनी की इजाजत से उन्हे वहां उधार राशन व अन्य सामान उपलब्ध करवाया जा रहा है। जब तक बंधक मजदूरी करते, उन्हें राशन मिलता रहता, काम छोड़ते तो उन्हें राशन मिलना बंद करवा दिया जाता था। महीनों से बिना वेतन के यही सिलसिला जारी रहा।

‘अमर उजाला’ से बातचीत में इराक बंधकों ने बताया कि अब इराक में उनकी राशन, दवाएं व अन्य चीजों की इतनी ज्यादा उधारी हो चुकी है कि यदि वे कंपनी से सिर्फ 30 फीसदी वेतन लेकर हिसाब-किताब कर लेते हैं, तो भी वे उधारी की रकम नहीं चुका सकते। अपने घर में पैसा लाने की बात तो दूर की है। बंधकों के अनुसार, इसलिए वे चाहते हैं कि उन्हें कम से कम अपनी मजदूरी का पूरा मेहनताना तो मिल जाए। इसलिए उन्होंने फिर से अंबेसी अफसरों को शिकायत कर दी है।
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