विभिन्न कारणों से भारतीय सेना के कई जवान और अफसर तनाव की जद में हैं। समस्या का समाधान करने के लिए सैन्य प्रशासन ने गंभीर होते हुए तीन तरीके ढूंढ निकाले हैं। दरअसल, बढ़ते तनाव की वजह से कई जवान तो शराब के आदी तक हो जाते हैं और कई बार तनाव इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि जवानों को आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ जाता है।
इसलिए सेना की ओर से जवानों और अफसरों को तनाव मुक्त बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। सेना की विभिन्न छावनियों में इसके लिए ‘मेंटल वैलनेस वीक’ आयोजित किए जा रहे हैं। जिसमें मनोवैज्ञानिकों, आर्ट ऑफ लीविंग, ध्यान विशेषज्ञों व योग शिक्षकों की मदद से जवानों और अफसरों को तनावमुक्त किया जा सके।
इसके अलावा ऐसे जवान जो बढ़ते तनाव के शराब के आदी हो जाते हैं, उनकी काउंसलिंग के लिए भी सेना विशेष तौर पर इंतजाम करवा रहे हैं। ये विशेषज्ञ इन जवानों और अफसरों को घेरने वाले तनाव की वजह को पकड़ेंगे और उन्हें इस अवसाद से बाहर निकालेंगे।
इसके लिए सैन्य जवानों, अफसरों और जरूरत पड़ने पर उनके परिजनों को भी विशेष काउंसलिंग में शामिल किया जाएगा। ये काउंसलिंग पूरी तरह से मेंटल हेल्थ स्ट्रेस मैनेजमेंट और साइकोसोमैटिक इलनैस (मनो शारीरिक रोगों) पर केंद्रित रहेगी।
तनाव से पड़ रहा सेहत पर असर
सुरक्षाबल
वरिष्ठ मनोविशेषज्ञ डा. कुलदीप सिंह बताते हैं कि जीवन में बढ़ता तनाव सेहत पर भी बुरा असर डालता है। इससे हेडेक , ब्लड प्रेशर, माइग्रेन , ज्वाइंट पेन, हाइपर टेंशन, डायबिटीज, अस्थमा इत्यादि कई तरह की बीमारियां इंसान को घेर लेती है।
काउंसलिंग में इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
- सैन्य जवानों के तनावग्रस्त होने की मुख्य वजह क्या है, उसकी जड़ तक पहुंचना
- तनाव की वजह पारिवारिक है, तो काउंसलिंग में उनके परिजनों को भी शामिल करना
- इच्छाओं और वास्तविकता का अंतर ही तनाव है, जवानों को ये समझाते हुए अंतर खत्म करना
- जवानों को जीवन का विश्लेषण करने का गुर सिखाते हुए उनकी दिनचर्या को दोबारा री-सैट करना।
- दिलोदिमाग में उठ रहे हर अच्छे-बुरे मनोभावों को किसी से भी शेयर करवाना
- फौज के धार्मिक शिक्षक जेसीओ को भी ट्रेंड करना कि वे किस तरह तनावग्रस्त जवानों की पहचान कर उनकी अध्यात्मिक काउंसलिंग करें।