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एक विधवा की आपबीती- 'साबित करो, सर्टिफिकेट दो सैनिक की पत्नी हो, तब मिलेंगी पेंशन और सुविधाएं'

Fri, 22 Jun 2018 09:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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रोती हुई महिला - फोटो : demo photo
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सैनिक की विधवा की आपबीती झकझोर देगी, पेंशन और अन्य सुविधाएं लेने के लिए उसे साबित करना होगा कि वह सैनिक की पत्नी है, सर्टिफिकेट देना होगा। मामला चंडीगढ़ का है। सैनिक की विधवा सिस्टम से लड़कर हार चुकी हैं। अब उनकी लड़ाई को दिव्यांग बेटा आगे बढ़ा रहा है।
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यह लड़ाई है अपना हक हासिल करने की। 74 साल की सावित्री देवी पति की मौत के बाद खुद का संवैधानिक वारिस प्रमाण पत्र बनवाने के लिए यूटी प्रशासन के चक्कर काटते काटते थक गईं। डेढ़ साल से वह अफसरों की मिन्नतें करती रहीं, लेकिन कोई नहीं पसीजा। हाल यह है कि उन्हें आज तक मृतक सैनिक की पत्नी होने का लीगल सर्टिफिकेट नहीं मिला।

मां ने हिम्मत हारी तो दिव्यांग बेटा मैदान में आ डटा। कहता है कि उनके सामने जीवन यापन का संकट है। हमें वह जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए, जो एक सैनिक के परिजनों को मिलती हैं।
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बलबीर ने लिया था बीआरएस

सैनिक का बेटा
चंडीगढ़ के मलोया कालोनी के रहने वाले बलबीर सिंह 1980 में सिकंदराबाद में सेना के ईएमई रेजीमेंट में सैनिक पद पर तैनात थे। बलबीर ने सर्विस में 15 वर्ष पूरे होने से पहले ही वीआरएस ले लिया था। विभागीय सूत्रों की मानें तो नौकरी से वीआरएस लेने के बाद ही बलबीर सिंह ने शादी की लेकिन उन्होंने सर्विस बुक में पत्नी का नाम दर्ज नहीं कराया। इसी कारण यह परेशानी सामने आई है।

पति की मौत के बाद जीवन यापन का संकट
फरवरी 2017 में बलबीर सिंह की बीमारी के चलते मौत हो जाने के बाद उसके परिवार पर जीवन यापन का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि वीआरएस लेने की वजह से बलबीर के परिवार को पेंशन तो नहीं मिल पाएगी। लेकिन पत्नी को विधवा पेंशन सहित अन्य सरकारी सेवाओं में मिलने वाला लाभ जरूर मिलेगा। इसके लिए सावित्री को स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्गत संवैधानिक वारिस प्रमाण पत्र की जरूरत है। पति की मौत के बाद ही सावित्री यूटी से लेकर जिला प्रशासन तक चक्कर लगा चुकी हैं।
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अब दिव्यांग बेटा लगा रहा है चक्कर

पेंशन
सवित्री का 32 वर्षीय बेटा नरेश है, जो जन्म से ही विकलांग है। नरेश का कहना है कि पिता की मौत के बाद से मां अक्सर बीमार रहती हैं। बीमारी की हालत में भी वह कई बार दफ्तरों के चक्कर काटती रहीं लेकिन किसी ने नहीं सुनी। अब वह चलने फिरने में असमर्थ हो गई हैं। इसीलिए अब मैं खुद सर्टिफिकेट बनवाने के लिए अफसरों के चक्कर काट रहा हूं। अभी तक कोई हल नहीं निकल पाया है।

जल्द भेज दी जाएगी जानकारी
जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के वरिष्ठ सहायक अधिकारी आरपी सिंह ने बताया कि डीसी के द्वारा उनसे बलबीर सिंह के सैनिक होने संबंधी जानकरी मांगी गई है। बलबीर सिंह हमारे यहां सैनिक रहे हैं। इसकी पूरी जानकारी प्रशासन को जल्द ही दे दी जाएगी। इसके बाद उनके परिवार को सरकार की ओर से मिलने वाली सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगेगा।
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