वेस्टर्न एयर कमांड के तहत फाइटिंग फिफ्टीन के नाम से प्रख्यात एक ऐसी घातक स्क्वाड्रन नंबर 15 हैं। जिसके संहार से दुश्मन देश भी कांपते हैं। सन 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपना पराक्रम दिखा चुकी ये स्क्वाड्रन सन 1962 में भारत-चीन युद्ध का भी सक्रिय हिस्सा थी। आज भी ये घातक स्कवाड्रन उतर भारत में न केवल देश की वायु सीमाओं की रक्षक है, बल्कि इसकी मारक क्षमता से दुश्मन भी थर्राता है।
अगस्त 1951 में गठित की गई इस खतरनाक स्क्वाड्रन नंबर 15 को भारतीय वायुसेना ने अब इसकी 69वीं वर्षगांठ पर याद करते हुए इसके पराक्रम का नमन किया है। ये स्क्वाड्रन इंडियन एयरफोर्स के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण जहाजों के बेड़ों में से एक है। जो आज भी वजूद में हैं और हमेशा एक खास युद्धक भूमिका के लिए तैयार रहता है।
देश की आजादी के बाद तत्कालीन सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर अगस्त 1951 में भारतीय वायुसेना ने स्क्वाड्रन लीडर बी. धतिगरा की कमान में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में स्क्वाड्रन नंबर 15 का गठन किया गया था। स्क्वाड्रन का मोटो यानी सिद्धांत तय किया गया ‘निहंतव्य शत्रव’ यानी ‘शत्रु का संहार’। वायुसेना के एक अफसर के अनुसार उस वक्त इस स्क्वाड्रन को ‘ स्पिटफायर एमके-एक्सवी111’ विमान से लैस किया गया। इस विमान को ‘भारत रक्षक’ का नाम दिया गया था।