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#हिंदीहैंहमः बच्चे हो रहे हिंदी से दूर, स्कूल में ही जगाना होगा भाषा प्रेम, तभी होगा प्रसार तेज

Wed, 26 Aug 2020 10:49 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
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हिंदी के विशेषज्ञ - फोटो : अमर उजाला
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सरकारी स्कूलों की भाषा तो हिंदी बन गई लेकिन अंग्रेजी स्कूल हिंदी से दूर होते जा रहे हैं। निजी स्कूलों में भी हिंदी के प्रति प्रेम जागृत करना होगा। हर भाषा का अपना महत्व होता है लेकिन हिंदुस्तान में हिंदी का अलग ही महत्व है। बच्चों में हिंदी पढ़ने व लिखने की आदत अभिभावकों को डालनी होगी। घरों में भी हिंदी में बातचीत करनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से हिंदी रोजगार की भाषा बन रही है।
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हिंदी में नौकरियां बहुत हैं
हिंदी के प्रति प्रेम शुरू से ही बच्चों में जागृत किया जाना चाहिए। जब घर से किसी काम की शुरुआत होती है तो बच्चे उसी चीज को आदर्श मानकर आगे बढ़ते हैं। हिंदी तेजी से रोजगार की भाषा बन रही है। इस भाषा में नौकरियां बहुत है।
- डॉ. अरुण सिंह ठाकुर, यूआईएचटीएम पीयू

हिंदी हो रही समृद्ध
भाषा के जरिये लोगों में संबंध बनते हैं और आगे तक कायम रहते हैं। यह लोगों को जोड़ने का काम करती है। हिंदी में ऐसी मिठास होती है कि हर व्यक्ति खींचा चला आता है। हिंदी में हर व्यक्ति को बात करनी चाहिए।
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- डॉ. सुमन मोर, चेयरपर्सन, पर्यावरण अध्ययन विभाग पीयू
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हिंदी से दिए जाते हैं संस्कार
हिंदी हमारी राष्ट्रीय औरमातृ भाषा है। यह दिलों की भाषा है। जब बच्चा पहली बार बोलता है तो उसके मुंह से मां निकलता है। इतना ही नहीं हम इस भाषा से ही अपने बच्चों को संस्कार दे सकते हैं। हमारे सभी ग्रंथ मातृ भाषा में लिखे गए हैं। ऐसे में हम सभी को इसका सम्मान करना चाहिए।
- वीके वैद, रिटायर्ड एसपी पंजाब

हिंदी पूरे राष्ट्र को पिरोती है माला में
हिंदी वह भाषा है जो पूरे देश को एक माला में पिरो देती है। हिंदी का क्रेज पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से लेकर अमेरिका, कनाडा और लंदन तक आम देखा जा सकता है। इतना ही नहीं अब तो विदेशों में भी लोग बच्चों को हिंदी सिखा रहे हैं। यहां तक कि आज के आईएएस और आईपीएस अधिकारी जो हमारे समाज को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने अपनी पूरी पढ़ाई हिंदी में की है। ऐसे में हमें हिंदी का सम्मान करना ही चाहिए।
- गिरीश आनंद, शिक्षाविद एवं मोटिवेशनल स्पीकर
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