पीजीआई के यूरोलॉजी विभाग में रोबोट पहुंच चुका है। विभाग का दावा है कि जनवरी के आखिरी सप्ताह तक रोबोट से सर्जरी शुरू हो जाएगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक एम्स और कई प्राइवेट हॉस्पिटलों में रोबोटिक सर्जरी पिछले डेढ़ साल से की जा रही है। इन अस्पतालों और पीजीआई के रोबोट में काफी अंतर है।
पीजीआई के रोबोट की खासियत है कि इसमें एक साथ दो सर्जन काम कर सकेंगे। इससे डॉक्टर अधिक एकाग्र होकर काम कर सकेंगे और सर्जरी ज्यादा सुरक्षित होगी।
एम्स के अस्पताल में मौजूद रोबोट में सिर्फ एक ही सर्जन काम कर सकता है। विशेष होने के कारण पीजीआई के रोबोट का मूल्य भी सामान्य से ज्यादा है।
यूरोलॉजी विभाग के हेड ऑफ डिपार्टमेंट एके मंडल और असिस्टेंट प्रोफेसर डा. रवि मोहन ने बताया कि पीजीआई एक ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट है। इस लिहाज से भी यह रोबोट काफी फायदेमंद साबित होगा।
एक सर्जन के साथ किसी रेजिडेंस और जूनियर डॉक्टर को भी बैठा सकेंगे। इससे ज्यादा से ज्यादा डॉक्टर ट्रेंड होंगे। रोबोट इंस्टॉल होने के बाद डॉक्टरों की कुछ दिन की ट्रेनिंग होगी और उसके बाद सर्जरी शुरू हो जाएगी। रोबोट को इंस्टॉल करने में दो महीने का वक्त लग सकता है। जनवरी के आखिरी में सर्जरी शुरू हो जाएंगी।
यह होती है रोबोटिक सर्जरी
यह रोबोट एक सर्जरी यंत्र है। इसे नियंत्रित करने की डोर सर्जन के पास होगी। इसमें हाथ की तरह यंत्र होंगे और बीच में थ्री डी कैमरा होगा। एम्स के अलावा दिल्ली के कई प्राइवेट अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी की जा रही है।
मरीजों को ये होगा फायदा
रोबोटिक सर्जरी से मरीजों को काफी फायदा मिलेगा। पहले पेट की सर्जरी में काफी लंबा चीरा लगाना पड़ता था। इसमें दो से तीन छोटे-छोटे छेद किए जाएंगे।
रोबोटिक सर्जरी में खून बहुत कम बहेगा। जब खून कम निकलेगा तो मरीज जल्दी ठीक होगा। दो से तीन घंटे बाद उसे घर भी भेजा जा सकेगा। दवाइयों का खर्च काफी कम होगा।
इस रोबोट से प्रोस्टेट, नेफ्रेक्टामी किडनी व अन्य सर्जरी की जा सकेंगी। रोबोटिक सर्जरी से डॉक्टरों को काफी फायदा मिलेगा। लेप्रोस्कोपी से आपरेशन में डाक्टरों को ज्यादा समय तक ऑपरेट करना पड़ता था। रोबोटिक में ऐसा नहीं होगा।