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PGI Research: सड़क हादसों में सबसे ज्यादा होती है Brain Injury, इलाज की व्यवस्था बेहद कम

Sun, 21 Aug 2022 03:13 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

विश्व में सड़क दुघर्टना में हो रही ब्रेन ट्रॉमा इंजरी में भारत की स्थिति बेहद खराब है। यहां जिस रफ्तार से दुर्घटना हो रही है उसकी तुलना में इलाज की व्यवस्था बेहद कम है इसलिए व्यापक स्तर पर राहत व बचाव कार्य की जरूरत है।
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विस्तार
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देश में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा ब्रेन इंजरी के मामले सामने आए हैं। इससे न्यूरो ब्रेन ट्रॉमा के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। दुर्घटना की तुलना में इलाज की व्यवस्था बेहद कम है। ब्रेन ट्रॉमा के केस में घायल को समय से इलाज नहीं मिल रहा है।

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यह हकीकत पीजीआई के विशेषज्ञों की ओर से कैम्ब्रिज ग्रुप के साथ किए हालिया शोध में सामने आई है। इसमें पाया गया है कि विश्व में सड़क दुघर्टना में हो रही ब्रेन ट्रॉमा इंजरी में भारत की स्थिति बेहद खराब है। यहां जिस रफ्तार से दुर्घटना हो रही है उसकी तुलना में इलाज की व्यवस्था बेहद कम है इसलिए व्यापक स्तर पर राहत व बचाव कार्य की जरूरत है।

शोध में शामिल पीजीआई न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. मंजुल त्रिपाठी ने बताया कि इसमें 57 देशों के रिकॉर्ड को शामिल किया गया। इसके बाद ब्रेन ट्रॉमा के 1873 केसों का अध्ययन किया गया। वहीं देश की विकास शीलता, इलाज की व्यवस्था, दुर्घटना के आंकड़ों जैसे बिंदुओं पर वर्ग तय किया गया। इसमें भारत मध्यम वर्ग में शामिल है। देशभर से ऐसे 700 केसों के विश्लेषण के आधार पर यह परिणाम सामने आया है। यहां दुर्घटनाएं तेजी से हो रही हैं लेकिन इलाज की व्यवस्था बेहद कम है। ट्रॉमा केस में 6 घंटे के अंदर इलाज मिलना आइडियल माना गया है लेकिन देश में यह समयावधि 20 से 21 घंटे है।

नीति निर्माण और शोध में होगा सहायक

डॉ. मंजुल त्रिपाठी ने बताया कि इस शोध का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना में आपात स्थिति से बचाव की व्यवस्था के साथ इलाज की कमियों से जुड़े बिंदुओं को सामने लाना है ताकि नीति निर्माणकर्ताओं को मदद मिल सके। वहीं सड़क दुर्घटना से बचाव के उपाय के साथ ब्रेन ट्रॉमा इंजरी के इलाज के लिए भी व्यवस्था करने की जरूरत है ताकि घायल को कम समय में बेहतर इलाज मिल सके।

इन देशों में भी स्थिति खराब

भारत के साथ जिन देशों को इस शोध में मध्यम वर्ग में रखा गया है उसमें पाकिस्तान, वर्मा, इंडोनेशिया, स्पेन, पुर्तगाल, स्पेन और कनाडा हैं।

देश के चार संस्थानों ने लिया भाग

इस शोध में पीजीआई समेत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर और दिल्ली एम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों ने एक महीने के ब्रेन ट्रॉमा के केस स्टडी का विश्लेषण किया है। इसके आधार पर देश की मौजूदा स्थिति का आकलन किया गया।

आंकड़े बयां कर रहे गंभीरता

देश में खराब सड़क, यातायात के नियमों का पालन न करना और शराब पीकर वाहन चलाना सड़क दुर्घटना का प्रमुख कारण है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े के अनुसार सड़क हादसों में हर घंटे 16 लोग जिंदगी गवां रहे हैं। देश के बड़े शहरों में दुर्घटनाओं और उनमें मरने वालों की संख्या ज्यादा है। इसमें दिल्ली सबसे ऊपर है। दिल्ली के अलावा चेन्नई, जयपुर, बेंगलुरु, मुंबई, कानपुर, लखनऊ, आगरा, हैदराबाद और पुणे का नाम शामिल है।

सबसे ज्यादा सड़क हादसे तमिलनाडु में हुए

साल 2017 से लेकर साल 2020 तक सड़क हादसों के मामले में तमिलनाडु नंबर-1 राज्य रहा है। इन चार साल में दो लाख से ज्यादा लोगों ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाई है। वहीं, तमिलनाडु के बाद सबसे ज्यादा हादसे मध्य प्रदेश में हुए। इसके बाद दूसरे, तीसरे और चौथे नंबर पर क्रमश: कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और केरल हैं। देश में कुल 1747094 एक्सीडेंट में से 8,97,815 एक्सीडेंट इन्हीं पांच राज्यों में हुए।

दुर्घटना संभावित जगहों की हो रही पहचान

राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना कम करने के लिए देशभर में ऐसी जगहों की पहचान की गई है, जहां सर्वाधिक दुर्घटनाएं होती हैं। सड़क दुर्घटनाओं में हुई मौतों के आधार पर 786 ब्लैक स्पॉट की पहचान की गई है। इनमें से 150 पीडब्ल्यूडी के दायरे में हैं। 501 एनएच स्ट्रेच एनएचएआई के साथ है और 138 राज्य सड़कों और अन्य एजेंसियों के दायरे में हैं।

वाहन चलाते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • वाहन चलाते समय वैध प्रपत्रों के साथ-साथ सदैव हेलमेट का प्रयोग करें।
  • नशे की हालत में वाहन न चलाएं।
  • बिना बीमा के वाहन नहीं चलाएं।
  • चारपहिया वाहनों में सीट बेल्ट का प्रयोग करें।
  • निर्धारित गति से अधिक एवं नशे या नींद की हालत में वाहन नहीं चलाएं।
  • चकाचौंध वाली और अनाधिकृत लाइटों का प्रयोग न करें।
  • समय-समय पर आंखों का परीक्षण योग्य चिकित्सक से करवाते रहें।
  • दोपहिया वाहनों पर कभी भी दो से अधिक सवारी न बैठाएं।
  • ट्रैक्टर-ट्रॉली या ट्रक में अवैध रूप से सवारी को न बैठाएं।
  • सड़क की बाईं तरफ चलें और सुरक्षित स्थान मिलने पर ही अपने दाएं हाथ की तरफ से ही ओवर टेक करें।
  • रात में डिपर का प्रयोग करें और वाहन मोड़ते व रोकते समय स्पष्ट संकेत दें।
  • 18 वर्ष से कम आयु वाले युवाओं को पेट्रोल या डीजल से चलने वाले वाहन न चलाने दें।
  • पैदल यात्रियों को सड़क पार करने का अवसर दें और स्टॉप व जेब्रा क्रॉसिंग का प्रयोग करें।
  • प्रेशर हॉर्न, सायरन एवं अचानक चौंकाने वाले हॉर्न का प्रयोग न करें।

चंडीगढ़ में सड़क हादसे में मरने वालों की संख्या हुई दोगुनी

साल 2021 में सड़क हादसों का ग्राफ काफी बढ़ गया। 2020 में 143 हादसों में जहां 46 लोगों की मौत हुई थी, वहीं 2021 में 185 हादसों में 87 लोगों ने जान गंवाई। शहर के पूर्वी इलाके में हुए हादसों में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। साल 2020 में पूर्वी इलाके में 18 लोगों की जान गई जबकि 2021 में 36 लोगों की मौत हुई। 2021 में 84 ऐसे घातक हादसे हुए, जिसमें 86 लोगों की मौत हुई। इनमें से ज्यादातर हादसों का मुख्य कारण रैश ड्राइविंग और ओवर स्पीड रहा। वहीं बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने से ज्यादातर मौतें हुईं। साल 2021 में सड़क हादसों में 70 पुरुष और 16 महिलाओं की मौत हुई है।

ये हुए दुर्घटना के शिकार

पैदल                              22

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साइकिल सवार                14
रेहड़ी चालक                     1
दोपहिया वाहन सवार       37
चार पहिया वाहन              6
ऑटो रिक्शा                     6

चंडीगढ़ में भी स्थिति खराब

वर्ष           दुर्घटना      घायल   मौतें

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2020        143          133       46
2021        185          158       87

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