एयरफोर्स और नेवी कर रही यूएवी का इस्तेमाल
अधिकारी ने बताया कि सेना ने आईएसआर (खुफिया, निगरानी) के साथ-साथ सटीक-हमला मिशन इत्यादि के लिए काफी संख्या में ड्रोन्स को अपने बेड़े में शामिल करने का रोडमैप तैयार कर लिया है। इसके साथ ही सेना मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) और दूर से संचालित विमान (आरपीए) भी लेकर आने की तैयार कर चुकी है। हालांकि एयरफोर्स और नेवी में यूएवी का प्रयोग पिछले करीब डेढ़ साल से किया जा रहा है।
तपस की क्षमताओं को बढ़ाने के प्रयास
सेना के अधिकारी ने बताया कि मौजूदा समय में थल, वायु और नौसेना के लिए कम से कम 150 नए मेल ड्रोन की आवश्यकता है। इसके लिए डीआरडीओ के साथ-साथ निजी कंपनियों द्वारा मेक-इन-इंडिया मेल ड्रोन को तैयार करने पर काफी तेजी से काम किया जा रहा है। इसके साथ ही डीआरडीओ ने तपस-बीएस-201 ड्रोन सहित यूएवी की नई रुस्तम श्रृंखला भी तैयार की है और अब तपस की क्षमताओं को बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं।
डीआरडीओ ने तैयार किया हथियारबंद ड्रोन आर्चर एनजी
इसके अलावा डीआरडीओ द्वारा विकसित हथियारबंद मेल ड्रोन आर्चर-एनजी भी तैयार किया जा रहा है, जिसकी जल्द ही पहली उड़ान होने की तैयारियां भी चल रही है। आर्चर-एनजी को आईएसआर मिशन, लक्ष्य प्राप्ति और सटीक हमलों के लिए करीब एक हजार किलोमीटर की रेंज के साथ डिजाइन किया गया है।
वहीं, सेना को अक्टूबर-2024 में अमेरिका के साथ किए गए अनुबंध के तहत एमक्यू-9बी प्रिडेटर ड्रोन भी मिलेंगे। इसके साथ ही भारत को वर्ष 2029 में हेलफायर मिसाइलों के अलावा जीबीयू-39बी ग्लाइड बम और अन्य हथियारों से लैस ड्रोन भी मिलेंगे।