फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संगठन मंत्री और सांसद की मदद से निर्दलीय पार्षद दलीप शर्मा जीते, टंडन गुट की हार

Thu, 05 Jul 2018 09:31 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
मिठाई खिलते हुए मेयर देवेश मोदगिल
विज्ञापन
नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ कमेटी के चेयरमैन पद के चुनाव में मेयर देवेश मोदगिल सांसद किरण खेर की मदद से टंडन गुट पर भारी पड़े हैं। इस चुनाव में मेयर की ओर से घोषित उम्मीदवार दलीप शर्मा ने चेयरमैन पद के चुनाव में जीत हासिल की है। बता दें कि दलीप शर्मा निर्दलीय पार्षद हैं। दलीप शर्मा ने भाजपा पार्षद शक्ति देव शाली को हराया है। कुल 8 में से शक्तिदेव शाली को मात्र दो ही वोट हासिल हुए, जबकि छह वोट दलीप शर्मा ने हासिल किए हैं।
विज्ञापन


मेयर के उम्मीदवार दलीप शर्मा को जितवाने के लिए संगठन मंत्री दिनेश कुमार ने भी सहयोग दिया। संगठन मंत्री ने कमेटी में शामिल भाजपा सदस्यों को फोन करके मोदगिल के उम्मीदवार को वोट डालने के लिए कहा, जबकि शक्ति देव शाली को भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन का समर्थन था। शक्ति देव शाली इस समय पार्टी के जिला अध्यक्ष भी हैं। शक्ति की हार से भाजपा में गुटबाजी और बढ़ गई है। संगठन मंत्री दिनेश कुमार की ओर से मेयर का साथ देने पर टंडन गुट भी उनसे नाराज हो गया है।

एक-दूसरे को दिखना चाहते हैं नीचा
अतिक्रमण हटाओ कमेटी का कार्यकाल सिर्फ छह माह का है, लेकिन इस चुनाव में लड़ाई अहम की थी। मेयर देवेश मोदगिल की प्रतिष्ठा दाव पर लगी हुई थी क्योंकि मेयर ने ही अतिक्रमण हटाओ कमेटी सहित कुल 14 कमेटियों के सदस्यों का नाम फाइनल किया था। मेयर को यह अधिकार सदन ने ही जनवरी माह में हुई बैठक में दिया था। कमेटियों के हर प्रस्तावित चेयरमैन का नाम मेयर की ओर से ही फाइनल किया गया था। 14 में से 13 कमेटियों के चेयरमैन निर्विरोध ही 25 जून को चुन लिए गए थे। सिर्फ अतिक्रमण हटाओ कमेटी के चेयरमैन पद के लिए दलीप शर्मा के खिलाफ शक्ति देव शाली ने नामांकन भरा। 22 साल के इतिहास में यह पहली बार हुआ है, जब किसी कमेटी के चेयरमैन पद के लिए चुनाव हुआ हो।
विज्ञापन


 दलीप शर्मा को हराकर टंडन गुट यह मैसेज देना चाहता था कि उसने निर्दलीय पार्षद को चेयरमैन का उम्मीदवार बनवाकर गलत किया है। भाजपा पार्षद शक्तिदेव शाली ने यह कहकर शर्मा के खिलाफ नामांकन भरा था कि दलीप शर्मा ने नगर निगम चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार राज किशोर को हराया है। पार्टी के उम्मीदवार को मेयर को चेयरमैन का उम्मीदवार नहीं बनाना चाहिए था।

मतदान करने वालों में भाजपा के 5 पार्षद
मेयर की ओर से अतिक्रमण हटाओ कमेटी का महेश इंद्र सिद्ध, दलीप शर्मा, शक्ति देव शाली, राजेश गुप्ता, सतीश कैंथ, जगतार जग्गा, एमएस कांडल, हरदीप सिंह और शीला फूल सिंह को सदस्य बनाया गया था। एमएस कांडल के पास मनोनीत होने के नाते वोटिंग का अधिकार नहीं था। ऐसे में कुल 8 मत में से भाजपा के 5 पार्षद हैं। इसके अलावा एक अकाली, एक कांग्रेस और एक निर्दलीय पार्षद सदस्य है। ऐसे में भाजपा के अपने पार्षदों ने ही शक्ति देव शाली को गुटबाजी हावी होने के कारण वोट नहीं डाला।

टंडन गुट को जीत का था भरोसा
भाजपा के कुल 5 में से 4 पार्षद टंडन गुट के हैं। इनमें शक्ति देव शाली के अलावा सतीश कैंथ, जगतार जग्गा और राजेश गुप्ता का नाम शामिल है। ऐसे में टंडन गुट को लगता था कि एक वोट उन्हें कांग्रेस की शीला फूल सिंह डाल देंगी। इनकी रणनीति यह भी थी कि कांग्रेस की शीला फूल सिंह मतदान करने के लिए न आएं, लेकिन शीला ने ऐसा न करके दलीप शर्मा को मतदान किया, जबकि टंडन के बाकी बचे 4 वोट में से दो वोट भी संगठन मंत्री दिनेश कुमार के बात करने पर मेयर के उम्मीदवार के पक्ष में चले गए। संगठन मंत्री ने फोन पर यही कहा कि मोदगिल का साथ दिया जाए।
विज्ञापन

दलीप शर्मा को ईनाम देना चाहते थे मोदगिल

बैठक में भाग लेते मेयर देवेश मोदगिल
जब भाजपा ने देवेश मोदगिल को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया था, तब टंडन गुट ने बगावत कर दी थी और पूर्व मेयर आशा जसवाल ने मोदगिल के खिलाफ ही निर्दलीय तौर पर नामांकन भर दिया था। उस समय टंडन गुट के पास कुल 13 पार्षद थे, जबकि उस समय निर्दलीय पार्षद दलीप शर्मा ने खुलकर मेयर देवेश मोदगिल का साथ दिया था। ऐसे में मोदगिल किसी कमेटी का दलीप शर्मा को चेयरमैन बनवाकर ईनाम देना चाहते थे। दलीप शर्मा सांसद किरण खेर के भी करीबी हैं। सांसद किरण खेर ने दलीप शर्मा को पिछले चुनाव में भाजपा का टिकट भी दिलवाने का प्रयास किया था, लेकिन जब टिकट नहीं मिली तो दलीप शर्मा निर्दलीय के तौर पर खड़े हो गए और चुनाव जीत गए।

जीत के बाद दलीप और मेयर गए संगठन मंत्री को मिलने
अतिक्रमण हटाओ कमेटी के चेयरमैन पद का चुनाव जीतने के बाद दलीप शर्मा, मेयर देवेश मोदगिल के साथ पंजाब भाजपा कार्यालय में संगठन मंत्री दिनेश कुमार को मिलने के लिए गए। जहां पर दलीप शर्मा ने संगठन मंत्री का आभार जताया। इसके साथ ही अब सरगर्मियां तेज हो गई हैं कि दलीप शर्मा जल्द ही भाजपा में शामिल हो जाएंगे। दलीप शर्मा ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि वह पहले भी भाजपा में थे और आगे भी भाजपा में ही शामिल होंगे।

कैंथ पर टंडन गुट को है शक
सूत्रों का कहना है कि राजेश गुप्ता पहले ही टंडन गुट को स्पष्ट कर गए थे कि वह संगठन मंत्री के कहने पर मेयर के उम्मीदवार को ही वोट डालेंगे। ऐसे में टंडन गुट को अब शक भाजपा पार्षद सतीश कैंथ पर है। चुनाव के बाद टंडन गुट की सीनियर डिप्टी मेयर के कमरे में मीटिंग भी हुई। यहां पर भाजपा पार्षद भरत कुमार की सतीश कैंथ के साथ जमकर बहस भी हुई, जबकि कैंथ ने मीटिंग में कहा कि उन्होंने वोट शक्ति देव शाली को डाली है।

संगठन मंत्री ने शक्ति को फोन करके चेतावनी भी दी
संगठन मंत्री दिनेश कुमार ने भाजपा पार्षद शक्ति देव शाली को फोन करके नामांकन वापस लेने के लिए कहा था। जब शक्ति नहीं माने तो उन्हें चेतावनी भी दी गई कि भविष्य में उन्हें फिर किसी कमेटी का चेयरमैन नहीं बनाया जाएगा। यह भी कहा गया कि पार्टी उन्हें भविष्य में मेयर देखना चाहती है, लेकिन नामांकन वापस न लेने पर वह यह अवसर खो देंगे। इसके बावजूद शक्ति देव शाली नहीं माने।

मालूम हो कि इससे पहले जब मेयर ने शक्ति देव शाली और राजेश कालिया को जनवरी माह के अंत में ही वित्त एवं अनुबंध कमेटी के चुनाव के लिए सदस्य के तौर पर चुनाव भरने के लिए कहा था तो उस समय शक्ति देव शाली और राजेश कालिया नामांकन भरने नहीं आए थे। उस समय फिर नामांकन से पहले मेयर और सांसद किरण खेर को पार्टी प्रभारी की मंजूरी के बाद मौके पर उम्मीदवार बदलने पड़े।  शक्ति देव शाली ने कहा कि, मुझे जो वोट मिले हैं, मैं उसका सम्मान करता हूं। अतिक्रमण हटाओ कमेटी के सदस्य के तौर पर काम करूंगा। 

मेयर ने नामांकन भरने के लिए कहा था। भाजपा, कांग्रेस और अकाली सभी दलों के पार्षदों के वोट मिले हैं। सभी को साथ लेकर काम किया जाएगा। यह मेयर देवेश मोदगिल की जीत है। 
-दलीप शर्मा


 संगठन मंत्री दिनेश कुमार ने कहा कि, कमेटियों को गठन करने का अधिकार सदन ने ही मेयर को दिया था। ऐसे में शक्ति देव शाली को नामांकन नहीं भरना चाहिए था। देवशाली ने ऐसा करके गलत किया है। देव शाली का नाम मेयर ने वाइस चेयरमैन के लिए तय किया था।
-दिनेश कुमार, संगठन मंत्री

सदन ने मुझे कमेटियों का गठन करने के लिए अधिकृत किया था। 13 सब कमेटियों के चेयरमैन का चुनाव निर्विरोध हुआ, लेकिन एक कमेटी के चुनाव की स्थिति जानबूझकर बनाई गई। इसका दुख है, यह नहीं होना चाहिए था। वहीं, इसका संतोष भी है कि इस कमेटी में शामिल भाजपा, कांग्रेस, अकाली और मनोनीत सदस्यों ने मिलकर उनके फैसले का समर्थन किया। इस सारे घटनाक्रम की जानकारी हाईकमान को दे दी गई है। पार्टी हाईकमान उचित कार्रवाई करेगी।
-देवेश मोदगिल, मेयर
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें