नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ कमेटी के चेयरमैन पद के चुनाव में मेयर देवेश मोदगिल सांसद किरण खेर की मदद से टंडन गुट पर भारी पड़े हैं। इस चुनाव में मेयर की ओर से घोषित उम्मीदवार दलीप शर्मा ने चेयरमैन पद के चुनाव में जीत हासिल की है। बता दें कि दलीप शर्मा निर्दलीय पार्षद हैं। दलीप शर्मा ने भाजपा पार्षद शक्ति देव शाली को हराया है। कुल 8 में से शक्तिदेव शाली को मात्र दो ही वोट हासिल हुए, जबकि छह वोट दलीप शर्मा ने हासिल किए हैं।
मेयर के उम्मीदवार दलीप शर्मा को जितवाने के लिए संगठन मंत्री दिनेश कुमार ने भी सहयोग दिया। संगठन मंत्री ने कमेटी में शामिल भाजपा सदस्यों को फोन करके मोदगिल के उम्मीदवार को वोट डालने के लिए कहा, जबकि शक्ति देव शाली को भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन का समर्थन था। शक्ति देव शाली इस समय पार्टी के जिला अध्यक्ष भी हैं। शक्ति की हार से भाजपा में गुटबाजी और बढ़ गई है। संगठन मंत्री दिनेश कुमार की ओर से मेयर का साथ देने पर टंडन गुट भी उनसे नाराज हो गया है।
एक-दूसरे को दिखना चाहते हैं नीचा
अतिक्रमण हटाओ कमेटी का कार्यकाल सिर्फ छह माह का है, लेकिन इस चुनाव में लड़ाई अहम की थी। मेयर देवेश मोदगिल की प्रतिष्ठा दाव पर लगी हुई थी क्योंकि मेयर ने ही अतिक्रमण हटाओ कमेटी सहित कुल 14 कमेटियों के सदस्यों का नाम फाइनल किया था। मेयर को यह अधिकार सदन ने ही जनवरी माह में हुई बैठक में दिया था। कमेटियों के हर प्रस्तावित चेयरमैन का नाम मेयर की ओर से ही फाइनल किया गया था। 14 में से 13 कमेटियों के चेयरमैन निर्विरोध ही 25 जून को चुन लिए गए थे। सिर्फ अतिक्रमण हटाओ कमेटी के चेयरमैन पद के लिए दलीप शर्मा के खिलाफ शक्ति देव शाली ने नामांकन भरा। 22 साल के इतिहास में यह पहली बार हुआ है, जब किसी कमेटी के चेयरमैन पद के लिए चुनाव हुआ हो।
दलीप शर्मा को हराकर टंडन गुट यह मैसेज देना चाहता था कि उसने निर्दलीय पार्षद को चेयरमैन का उम्मीदवार बनवाकर गलत किया है। भाजपा पार्षद शक्तिदेव शाली ने यह कहकर शर्मा के खिलाफ नामांकन भरा था कि दलीप शर्मा ने नगर निगम चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार राज किशोर को हराया है। पार्टी के उम्मीदवार को मेयर को चेयरमैन का उम्मीदवार नहीं बनाना चाहिए था।
मतदान करने वालों में भाजपा के 5 पार्षद
मेयर की ओर से अतिक्रमण हटाओ कमेटी का महेश इंद्र सिद्ध, दलीप शर्मा, शक्ति देव शाली, राजेश गुप्ता, सतीश कैंथ, जगतार जग्गा, एमएस कांडल, हरदीप सिंह और शीला फूल सिंह को सदस्य बनाया गया था। एमएस कांडल के पास मनोनीत होने के नाते वोटिंग का अधिकार नहीं था। ऐसे में कुल 8 मत में से भाजपा के 5 पार्षद हैं। इसके अलावा एक अकाली, एक कांग्रेस और एक निर्दलीय पार्षद सदस्य है। ऐसे में भाजपा के अपने पार्षदों ने ही शक्ति देव शाली को गुटबाजी हावी होने के कारण वोट नहीं डाला।
टंडन गुट को जीत का था भरोसा
भाजपा के कुल 5 में से 4 पार्षद टंडन गुट के हैं। इनमें शक्ति देव शाली के अलावा सतीश कैंथ, जगतार जग्गा और राजेश गुप्ता का नाम शामिल है। ऐसे में टंडन गुट को लगता था कि एक वोट उन्हें कांग्रेस की शीला फूल सिंह डाल देंगी। इनकी रणनीति यह भी थी कि कांग्रेस की शीला फूल सिंह मतदान करने के लिए न आएं, लेकिन शीला ने ऐसा न करके दलीप शर्मा को मतदान किया, जबकि टंडन के बाकी बचे 4 वोट में से दो वोट भी संगठन मंत्री दिनेश कुमार के बात करने पर मेयर के उम्मीदवार के पक्ष में चले गए। संगठन मंत्री ने फोन पर यही कहा कि मोदगिल का साथ दिया जाए।