विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब में तो सेंटर खुल रहे हैं लेकिन ऐसे कदम हरियाणा और हिमाचल को भी उठाना पड़ेगा तभी पीजीआई चंडीगढ़ की भीड़ नियंत्रित हो सकेगी। हालांकि हिमाचल के बिलासपुर में भी एम्स खोला जा रहा है और इसका निर्माण भी पीजीआई की देखरेख में हो रहा है।
बठिंडा एम्स में होंगी ये सुविधाएं
177 एकड़ में बने बठिंडा एम्स में 750 बेड बनने हैं। इसमें दस स्पेशलिस्ट और 11 सुपर स्पेशलिस्ट डिपार्टमेंट होंगे। 16 अल्ट्रा मार्डर्न ऑपरेशन थियेटर होंगे। एमबीबीएस की 100 सीटें होंगी, जबकि 60 नर्सिंग की। एमबीबीएस का पहला बैच इसी साल से फरीदकोट स्थित बाबा फरीद यूनिवर्सिटी आफ हेल्थ साइंसेज में शुरू हुआ है।
जब यह बैच शुरू हुआ तो उस दौरान एम्स की बिल्डिंग बन रही थी इसलिए अस्थाई तौर पर वहां एमबीबीएस का पहला बैच शुरू किया गया। 23 दिसंबर से आर्थोपेडिक्स, जनरल सर्जरी, आंकोलॉजी, यूरोलाजिस्ट, जनरल मेडिसिन, ईएनटी, नेत्र विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक, स्किन, गाइनी, डेंटल, रेडियोलाजी (एक्सरे-अल्ट्रासाउंड), बेसिक बायोकेमेस्ट्री और बेसिक हीमेटोलॉजी टेस्ट शुरू किए जाएंगे। ओपीडी खुलने का वक्त सुबह नौ बजे से है और रजिस्ट्रेशन सुबह आठ से 11 बजे तक होगी।
कुछ समय बाद ये सुविधाएं भी मिलेंगी
एम्स के निर्माण की अंतिम तारीख नवंबर 2020 तय की गई है। निर्माण पूरा होने के बाद ही इनडोर सेवाएं शुरू होंगी। एम्स में आने वाले समय में स्पेशल मेडिसिन क्लीनिक, पैथोलाजी, माइक्रोबायोलॉजी, कीमोथैरेपी, अमृत स्टोर शुरू होगा। अभी फिलहाल आयुष्मान की सेवाएं शुरू नहीं हुईं हैं। इनडोर सेवा शुरू होते ही आयुष्मान का लाभ मरीजों को मिलने लगेगा।
बठिंडा एम्स शुरू होने से पीजीआई के साथ पंजाब पर भी असर पड़ेगा। उस इलाके में ऐसा कोई बड़ा संस्थान नहीं है। वहां के लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। जो इलाज के लिए यहां आते थे, वे अब यहां की बजाय वहीं इलाज कराएंगे। -प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई