सेक्टर-15 के शिशु गृह में में अव्यवस्था के चलते करीब 50 बच्चे कैदियों से बदतर जिंदगी बिताने को मजबूर हैं।
यहां अनाथ बच्चों की जीवन की कठिनाइयों को दूर करने के लिए आश्रय दिया जाता है, लेकिन अव्यवस्था ऐसी है कि उन्हें चहलकदमी करने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं मिलती।
महज दो कमरों में करीब 50 बच्चों को रखा गया है, जिससे उनका शारीरिक व मानसिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे माहौल में कई बच्चे बीमारी भी हैं।
लाइब्रेरी ने घेर रखी है जगह
बच्चों के लिए बने दो कमरों से ज्यादा जगह शिशु गृह में बनी लाइब्रेरी ने घेर रखी है। इसका जब निर्माण हुआ था, उस समय बच्चों की संख्या 15 के करीब थी। अब 47 बच्चे हैं और कई बार यह संख्या 60 से 70 तक पहुंच जाती है। इसके बावजूद जगह नहीं बढ़ाई गई।
मजबूरन आफिस में दी बच्चों को जगह
कुछ दिनों पहले तक शिशु गृह में एक कमरे में 47 बच्चों को रखा जाता था, लेकिन जब बच्चों को ज्यादा परेशानी होने लगी तो आफिस के कमरे को ही बच्चों का कमरा बना दिया गया।
डीसी के आदेश भी ताक पर
बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उपायुक्त डा. एसएस फुलिया ने दो-तीन महीने पहले ही लाइब्रेरी के अधिकारियों को आदेश दिए थे कि 10 दिनों के अंदर इसे दूसरी जगह शिफ्ट करें, लेकिन यह समय बीतने के बाद भी लाइब्रेरी को शिफ्ट नहीं किया गया।
बच्चों को हो सकती हैं ये बीमारियां
बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, कंजस्टेड जगह में इतने बच्चों को एक साथ रखने पर कई तरह की बीमारियां फैल सकती हैं। सबसे ज्यादा एलर्जिक और इंफेक्शन से संबंधित बीमारियां फैलने का खतरा रहता है।
स्किन डिजीज, स्केबीज, फंगल इनफेक्शन, बैक्टीरियल इनफेक्शन, चिकन पॉक्स, इनफेटाइको। अन्य बीमारी वायरल फीवर, सर्दी, टीवी, निमोनिया, हाइजेनिक अन्य तरह की बीमारी।
इस संबंध में डीसी को जानकारी दी गई थी। उन्होंने लाइब्रेरी इंचार्ज को जल्द ही जगह तलाश कर खाली करने के निर्देश दिए हैं।
बीरेंद्र सिंह, जिला बाल कल्याण अधिकारी
शिशु गृह से लाइब्रेरी को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए दो जगह बातचीत चल रही है। जल्द ही शिफ्ट कराया जाएगा।
डा. एसएस फुलिया, उपायुक्त