चंडीगढ़। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर में नॉन कोविड मरीजों के इलाज पर फिर खतरा मंडराने लगा है। पहली और दूसरी लहर के दौरान हजारों मरीजों को सर्जरी के लिए जिस तरह महीनों राह तकनी पड़ी थी, वह स्थिति दोबारा उत्पन्न हो गई है। तीसरी लहर के शुरुआती दौर में ही संक्रमण के खतरे को देखते हुए पीजीआई समेत अन्य सरकारी व निजी अस्पतालों ने सामान्य सर्जरी पूरी तरह बंद कर दी है। 10 जनवरी से अस्पतालों की ओपीडी के साथ ही सामान्य सर्जरी पर रोक लगा दी गई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि महज आठ दिनों में ही 2184 मरीजों की सर्जरी टाल दी गई। इससे मरीज काफी परेशान हैं, क्योंकि उन्हें सरकारी और न ही निजी अस्पताल में इलाज मिल पा रहा है।
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ओपीडी के हजारों मरीजों का बढ़ गया दर्द
सामान्य दिनों में पीजीआई की ओपीडी में 12 से 15 हजार मरीज प्रतिदिन आते हैं, जबकि जीएमसीएच-32 जीएमएसएच-16 को मिलाकर यह आंकड़ा तीन से चार हजार का होता है। निजी अस्पतालों में भी प्रतिदिन दो से ढाई हजार मरीज ओपीडी में देखे जाते हैं। शहर में एक दिन में लगभग 20 से 22 हजार मरीजों को इलाज मिलता है। तीसरी लहर के कारण ओपीडी सेवा बंद होने से यह आंकड़ा तीन से चार हजार पर आ गया है, क्योंकि मरीजों को टेलीकंसल्टेशन व टेलीमेडिसिन के माध्यम से ही फोन पर परामर्श दिया जा रहा है। बेहद गंभीर मरीज को ही डॉक्टर टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से परामर्श देने के बाद जरूरी होने पर ओपीडी में बुला रहे हैं।
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जीएमसीएच-32 में 5 दिसंबर से सर्जरी बंद
गौरतलब है कि नीट काउंसलिंग की मांग पर जीएमसीएच-32 के रेजिडेंट डॉक्टरों ने 5 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल कर दी थी। उस दौरान अस्पताल प्रशासन को ओपीडी के साथ ही सामान्य सर्जरी भी बंद करनी पड़ी थी। रेजिडेंट डॉक्टरों के काम पर लौटने के कुछ दिन बाद ही कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार के कारण ओपीडी और सर्जरी पुन: बंद कर दी गई है।
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इन मरीजों की सर्जरी हुई बंद
अस्पतालों में रुटीन सर्जरी पूरी तरह से बंद होने के कारण अपेंडिक्स, यूट्रस, हृदय संबंधी जैसे स्टेंट, पेसमेकर लगाना, अंग प्रत्यारोपण, आंख, नाक, कान, गला, पथरी, हड्डी संबंधी मर्ज की सर्जरी, गिल्टी, गांठ, सिस्ट, ट्यूमर, हर्निया और प्लास्टिक सर्जरी के मरीजों के इलाज पर संकट आ गया है।
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निजी अस्पताल में भी सर्जरी बंद
आईएमए ने भी शहर के सभी निजी अस्पतालों में रूटीन सर्जरी बंद कर दी। शहर में लगभग 25 निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। यहां महीनेभर में इमरजेंसी और सामान्य मिलाकर लगभग चार हजार सर्जरी होती है। आईएमए अध्यक्ष डॉ. वरिंदर कप्पल ने बताया कि गर्भवती महिलाओं के साथ ही इमरजेंसी के केस में सर्जरी की जा रही है, लेकिन प्लांड सर्जरी पूरी तरह बंद कर दी गई है। ज्यादातर मरीज संक्रमण के डर से सर्जरी कराने में डर रहे हैं। वहीं शहर के बड़े अस्पतालों में 50 प्रतिशत बेड कोविड-19 के लिए आरक्षित हो जाने से भी सामान्य सर्जरी फिलहाल बंद कर दी गई है।
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सामान्य दिनों में एक महीने की सर्जरी का आंकड़ा
अस्पताल इमरजेंसी और ट्रॉमा सर्जरी रुटीन सर्जरी
पीजीआई 1050 और 1500 2500
जीएमसीएच-32 300 1200
जीएमएसएच-16 150 600
निजी अस्पताल 1500 2500
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यहां चल रही इतनी ओटी
पीजीआई 40 में से 18
जीएमसीएच-32 के 14 में से 5
जीएमएसएच-16 के 4 में से 2
कोट-
अस्पताल की चार ओटी में से दो कोरोना के लिए आरक्षित कर दी गई हैं जबकि दो में इमरजेंसी व ट्रॉमा के केस किए जा रहे हैं।
-डॉ वीके नागपाल, चिकित्सा अधीक्षक जीएमएसएच-16
कोट-
मौजूदा समय में 18 ओटी संचालित की जा रही हैं, जिसमें केवल इमरजेंसी केस किए जा रहे हैं। सामान्य या नियोजित सर्जरी फिलहाल पूरी तरह बंद है।
-डॉ अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता
कोट-
हड्डी रोग के साथ ही कैंसर व गर्भवती महिलाओं से जुड़े मामलों में सर्जरी की जा रही है। जबकि ओपीडी में आने वाले मरीजों को फिलहाल सर्जरी की डेट नहीं दी जा रही। क्योंकि अभी संक्रमण की रफ्तार काफी तेज है।
-डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच- 32