चंडीगढ़। नगर निगम ने पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे एजेंडे पास किए हैं, जो सिर्फ कागजी थे। एमसी गेस्ट हाउस से लेकर सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के लिए गाड़ी की व्यवस्था तक, ऐसे कई एजेंडे निगम की सदन ने पारित तो कर दिए लेकिन धरातल पर उतारने की पहल नहीं हो सकी। ये सभी फाइलों में ही सिमटकर रह गईं।
नवंबर 2023 में सदन ही बैठक के दौरान सेक्टर-47 में पुराने कम्युनिटी सेंटर को तोड़कर 500 लोगों की क्षमता का कम्युनिटी सेंटर और एक नगर निगम का गेस्ट हाउस बनाने का फैसला हुआ। पार्षद जसबीर लाडी ने मांग रखी थी। सभी पार्षदों ने इसे अच्छा आइडिया बताया था और एजेंडे को पास कर दिया था। निगम का अपना गेस्ट हाउस होना चाहिए। ऐसे में सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पास कर दिया गया। वर्ष अक्टूबर 2022 में निगम ने शहर का पहला बैंक्वेट हॉल बनाने का एजेंडा लाया गया था। इस पर 76 करोड़ रुपये का खर्च आना था। पार्षदों ने एजेंडे को पास कर दिया था। यहां तक फैसला लिया गया कि अगर निगम इसे बनाएगा तो 26 साल में पैसा रिकवर होगा, इसलिए पीपीपी मोड पर बनाया जाएगा। एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी करने और रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर भी चर्चा हो गई। यह भी तय किया गया कि तीन हॉल बनाए जाएंगे लेकिन सारा प्रस्ताव ठप हो गया।
न पार्षदों का मानदेय बढ़ा, न सीनियर डिप्टी मेयर को मिली गाड़ी
नगर निगम के सदन की बैठक में कई बार चर्चा हो चुकी है कि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को गाड़ी मिलनी चाहिए, क्योंकि निगम में एसडीओ-एक्सईएन के पास भी सरकारी गाड़ी है। ऐसे में शहर के सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को तो मिलनी ही चाहिए। पार्षदों ने इस पर सहमति भी जताई है लेकिन आज तक आधिकारिक रूप से इस पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई है। वहीं, सितंबर 2023 में एफएंडसीसी की बैठक में पार्षदों के मानदेय को भी दोगुना करने पर चर्चा हुई थी। पार्षदों ने पंजाब का हवाला देते हुए कहा था कि वहां पर 30 से 40 हजार रुपये पार्षदों को मिलता है लेकिन चंडीगढ़ में सिर्फ साढ़े 17 हजार रुपये मिलते हैं। इस पर भी पार्षदों ने सहमति जताई और बढ़ाने की बात कही लेकिन यह भी आज तक धरातल पर नहीं उतरा। इसके अलावा, निगम को वित्तीय संकट से बाहर निकालने के लिए एक विशेष बैठक भी बुलाई गई थी, जिसमें सभी पार्षदों ने कई अलग-अलग सुझाव दिए थे, उनमें से भी महज एक या दो को छोड़कर किसी पर कोई खास काम नहीं हुआ है।